भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील जल्द ही फाइनल हो सकती है। सिर्फ एक परसेंट मुद्दों पर ही सहमति बनना बाकी है। यह बात भारत में अमेरिका के एंबेसडर सर्जियो गोर ने कही है। वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), दिल्ली में 'US-इंडिया TRUST इनीशिएटिव: रिसर्च एंड इनोवेशन में पार्टनरशिप को आगे बढ़ाना' पर बोल रहे थे। गोर ने भारत-US के रिश्ते के अलग-अलग पहलुओं पर बात की और कहा कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, ट्रेड और इनवेस्टमेंट, जरूरी टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्रों में इसे और बढ़ाने के बड़े मौके हैं।
गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड समझौता लगभग फाइनल होने वाला है। इस एग्रीमेंट से दोनों देशों के लिए खुशहाली आएगी। पिछले हफ्ते ही, भारत ने ट्रेड डील के आखिरी एक परसेंट को फाइनल करने के लिए वाशिंगटन DC में एक टीम भेजी थी। उन्होंने आगे कहा, "अगले हफ्ते, हम बातचीत को जारी रखने के लिए अमेरिका के एक प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करेंगे। हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों और महीनों में ट्रेड डील पर साइन हो जाएंगे।"
20 साल में द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर हुआ 220 अरब डॉलर
उनके मुताबिक, सिर्फ दो दशकों यानि कि 20 साल में भारत और अमेरिका के बीच माल और सेवा में द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भी कहा, "आज US भारत के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक है, और भारत US के टॉप ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक है।" भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में एक अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर सहमत होने के बारे में एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया था।
उभरते मौकों का फायदा उठाने के लिए भारत-US से बेहतर कोई पार्टनरशिप नहीं
गोर ने यह भी कहा कि उभरते मौकों, खासकर हाई-टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स का फायदा उठाने के लिए भारत और US के बीच पार्टनरशिप से बेहतर कोई पार्टनरशिप नहीं है। गोर के मुताबिक, "हम एक ऐसे अहम मोड़ पर आ गए हैं, जहां जरूरी और उभरती टेक्नोलोजिज ग्लोबल पावर बैलेंस को पूरी तरह से बदल रही हैं। और मेरा मानना है कि इस काम को लीड करने के लिए हमारी पार्टनरशिप से बेहतर कोई पार्टनरशिप नहीं है।"
यह भी कहा, "इस बड़े बदलाव के साथ-साथ, मैं चाहता हूं कि हम महत्वाकांक्षी बनें और US-भारत के रिश्ते को 21वीं सदी की डिफाइनिंग स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में बदलें। ऐसी पार्टनरशिप जो दोनों देशों और हमारे लोगों को ठोस फायदे दे।" गोर का यह भी मानना है कि ताकतों को मिलाने और अपने लोगों को टेक्नोलॉजिकल बदलाव के सेंटर में रखने के लिए भारत और अमेरिका से बेहतर कोई दो देश नहीं हैं।