Maruti, M&M और Tata Motors तैयार; भारत और यूके के कारोबारी समझौते से बन रहे तगड़े मौके

भारत और यूके के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर भारत की दिग्गज कार कंपनियों ने कमर कस ली है। एफटीए का उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के आपसी व्यापार को दोगुना कर $10 हजार करोड़ तक पहुंचाने का है। इसके तहत जिन बातों पर सहमति बनी है, उसके तहत अब मारुति (Maruti), महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और टाटा मोटर्स पीवी (Tata Motors PV) कैलकुलेशन कर रही हैं। जानिए एग्रीमेंट में क्या है और कंपनियां का क्या कहना है

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 4:26 PM
भारत और यूके के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) एग्रीमेंट के तहत भारत में बनी ईवी को यूके में एंट्री पर ड्यूटी में राहत 20 हजार पाउंड से कम, 20-40 हजार पाउंड (करीब ₹25-और 40-80 हजार पाउंड (करीब ₹50 लाख-₹1 करोड़) वाली गाड़ियों को मिलेगी। (FIle Photo- Pexels)

देश में बनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की यूनाइटेड किंगडम (यूके) में चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी-फ्री एंट्री के लिए सौदा हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक देश की दिग्गज कंपनियां मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra-M&M) और टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स (Tata Motors PV) इस मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से मौकों का कैलकुलेशन कर रही हैं। भारत और यूकेके बीच CETA (कंप्रहेंसिव इकनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट) 15 जुलाई से लागू होगा। इसके तहत भारत में बनी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलते वाली पैसेंजर वेईकल्स को छठे वर्ष से कोटा-बेस्ड सिस्टम के तहत बिना किसी कस्टम ड्यूटी के यूके में एंट्री की मंजूरी मिलेगी।

निर्यात को लेकर क्या हुआ है एग्रीमेंट

एग्रीमेंट के तहत भारत में बनी ईवी को यूके में एंट्री पर ड्यूटी में राहत 20 हजार पाउंड से कम, 20-40 हजार पाउंड (करीब ₹25-और 40-80 हजार पाउंड (करीब ₹50 लाख-₹1 करोड़) वाली गाड़ियों को मिलेगी। 80 हजार पाउंड (करीब ₹1 करोड़) से महंगी गाड़ियों को यूके में बिना ड्यूटी एंट्री नहीं मिलेगी। गाड़ियों के निर्यात का यह कोटा छठे वर्ष में 17,600 गाड़ियों से शुरू होगा और धीरे-धीरे बढ़कर 15वें वर्ष में सालाना 88 हजार गाड़ियों तक पहुंच जाएगा।


छठे साल में भारत से 20,000 पाउंड से कम कीमत वाली 6,800 गाड़ियां और 20,000-40,000 पाउंड कैटेगरी की 6,800 गाड़ियां निर्यात हो सकेगी। वहीं 40,000-80,000 पाउंड कैटेगरी की 4,000 गाड़ियों का कोटा तय किया गया है। इस प्रकार कुल कोटा 17,600 गाड़ियों का होगा। 15वें वर्ष से यह कोटा बढ़कर 20,000 पाउंड से कम और 20,000-40,000 पाउंड कैटेगरी में 34,000-34,000 गाड़ियों तक पहुंच जाएगा, जबकि 40,000-80,000 पाउंड कैटेगरी के लिए 20,000 गाड़ियों का कोटा होगा।

क्या कहना है Maruti Suzuki, M&M और Tata Motors PV का

महिंद्रा एंड महिंद्रा ऑटोमोटिव बिजनेस के प्रेसिडेंट वेलुसामी आर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि इस समझौते से भारत में बनी ईवी के लिए नए मौके पैदा हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूके राइट-हैंड-ड्राइव मार्केट है तो इलेक्ट्रिक एसयूवी के लिए वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत इसका वैल्यूएशन किया जाएगा।

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती का कहना है कि इस एग्रीमेंट से भारतीय कंपनियों को निर्यात के मौकों का फायदा उठाने में मदद मिल सकती है। राहुल का कहना है कि मारुति सुजुकी ने पहले ही ईविटारा का यूरोप में निर्यात करना शुरू कर दिया है और लॉन्च के नौ महीनों के भीतर लगभग 36 हजार कारों का निर्यात किया जा चुका है और इस दौरान यूके इसका सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर्स वेईकल्स ने भारत और यूके के बीच एग्रीमेंट को सस्टेनेबल मोबिलिटी के निर्यात को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। टाटा मोटर्स के प्रवक्ता का कहना है कि इस एग्रीमेंट से भारत में बनी ईवी के लिए निर्यात के नए मौके खोलते हुए घरेलू मार्केट में कॉम्पटीशन को भी सपोर्ट मिलेगा।

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