Sir Ratan Tata Trust में विवाद! मेहली मिस्त्री ने दायर की याचिका, उठाए ये सवाल

Tata News: रतन टाटा (Ratan Tata) की मौत के बाद टाटा के ट्रस्ट में विवाद शुरू हो गया है। मेहली मिस्त्री ने सर रतन टाटा ट्रस्ट में फिर से ट्रस्टी नहीं बनाए जाने पर याचिका फाइल की है तो साथ ही ट्रस्ट में कई बात को लेकर सवाल उठाए हैं और हस्तक्षेप की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 2:11 PM
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मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) के ट्रस्टी के रूप में अपने कार्यकाल का रिन्यूअल नहीं किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) के ट्रस्टी के रूप में अपने कार्यकाल का रिन्यूअल नहीं किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने इसे लेकर महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के पास याचिका दायर की है। मेहली मिस्त्री ने इसके अलावा ट्रस्ट में गवर्नेंस, हितों के टकराव और डिसीजन-मेकिंग से जुड़े कई आरोप भी लगाए हैं। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के सेक्शन 22 के तहत विस्तृत आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने रतन टाटा की मौत के बाद ट्रस्ट के कुछ फैसलों और कुछ ट्रस्टी की नियुक्तियों की जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

4 जून को दायर याचिका में जिक्र है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने 17 अक्टूबर 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसका उद्देश्य मौजूदा गवर्नेंस को बनाए रखने के लिए ट्रस्टियों की फिर से नियुक्ति करनी थी। मेहली मिस्ट्री का आरोप है कि उनके मामले में इस सहमति का पालन नहीं किया गया और उनका कार्यकाल को रिन्यू नहीं किया गया। मेहली का कहना है कि यह मनमाना फैसला था और रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्टों में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से पारित प्रस्ताव की भावना के विपरीत था।


याचिका में सिर्फ ट्रस्टी की नियुक्तियों पर सवाल नहीं उठाए गए हैं बल्कि टाटा ट्रस्ट्स की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी चिंता जताई। मेहली मिस्त्री का आरोप है कि कुछ ट्रस्टियों को ट्रस्टी और नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में काम करते हुए टाटा ग्रुप की कंपनियों से वित्तीय फायदे मिले। याचिका में जिक्र है कि ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन को टाटा ग्रुप की कंपनियों टाटा सन्स, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, टाटा लॉकहीड मार्टिन ऐरोस्ट्रक्चर्स और टाटा सिकोर्स्की ऐरोस्पेस से कई वर्षों में ₹20 करोड़ से अधिक पेमेंट और कमीशन मिले। मेहली मिस्त्री ने इसकी न्यासी यानी फिड्यूसरी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से गहरी जांच करने की मांग की है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ट्रस्टियों का काम सिर्फ चैरिटेबल ट्रस्टों के हित में काम करना है और किसी भी संभावित हितों के टकराव की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि चैरिटेबल ट्रस्टों के नामित प्रतिनिधि के रूप में टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड में काम करते समय ट्रस्टियों को जो पैसे मिलते हैं, उसकी हितों के टकराव के दृष्टिकोण से समीक्षा होनी चाहिए।

मेहली मिस्त्री ने याचिका में कुछ प्रशासनिक मुद्दों का भी जिक्र किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्टों से जुड़ी एंटिटीज को प्रभावित करने वाले कुछ फैसले पर्याप्त परामर्श और पारदर्शिता के बिना लिए गए।

मेहली मिस्त्री ने किया यह अनुरोध

याचिका में आरोपों के आधार पर मेहली मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि ट्रस्टियों के आचरण की जांच, कथित हितों के टकराव और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा ट्रस्ट की प्रशासनिक सुरक्षा के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि प्रशासनिक चिंताओं के समाधान तक ट्रस्ट के मामलों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया जाए।

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