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CCPA के ₹10 लाख के जुर्माने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची Meta, फेसबुक पर वॉकी-टॉकी की बिक्री का है मामला

जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने Meta की याचिका पर सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख तय की है। साथ ही उसे यह बताने को कहा है कि CCPA के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे कहा जा सकता है। जज ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा है कि नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन इस मामले पर विचार क्यों नहीं कर सकता

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 18, 2026 पर 1:06 PM
CCPA के ₹10 लाख के जुर्माने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची Meta, फेसबुक पर वॉकी-टॉकी की बिक्री का है मामला
कारोबारों और कमर्शियल सेलर्स को Facebook Marketplace पर लिस्टिंग क्रिएट करने की इजाजत नहीं है।

इस साल की शुरुआत में सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने मेटा पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना फेसबुक मार्केटप्लेस पर कथित तौर पर बिना इजाजत वॉकी-टॉकी बेचने और लिस्ट करने के लिए है। अब मेटा (Meta Platforms Inc) CCPA के इस जुर्माने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई है। कंपनी के सीनियर वकील ने दलील दी है कि Amazon और Flipkart के उलट फेसबुक कोई ई-मार्केट नहीं है, बल्कि सिर्फ एक नोटिस बोर्ड है। इसलिए CCPA का इस पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता।

जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने Meta की याचिका पर सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख तय की है। साथ ही उसे यह बताने को कहा है कि CCPA के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे कहा जा सकता है। जज ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा है कि नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन इस मामले पर विचार क्यों नहीं कर सकता।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मेटा की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि Facebook न तो खरीदने-बेचने का कोई जरिया देता है और न ही यूजर्स से कोई कमीशन लेता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं है। उनके मुताबिक, "हम कोई वर्चुअल खान मार्केट नहीं चला रहे हैं। यह तो बस एक नोटिस बोर्ड है, जो सिर्फ फेसबुक यूजर्स के लिए है। हम कोई दुकान नहीं हैं। यहां किसी भी तरह की कमर्शियल बिक्री की इजाजत नहीं है। इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जाता। हम किसी से भी कोई चार्ज नहीं लेते।"

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