सैमसंग ने भारत सरकार की ओर लगाए गए 601 मिलियन डॉलर (लगभग 5,174 करोड़ रुपये) के टैक्स और जुर्माने के दावे के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की बात कही है। भारतीय कस्टम अधिकारियों ने टेलीकॉम उपकरणों के आयात पर कथित रूप से गलत वर्गीकरण (misclassification) करके टैक्स बचाने के आरोप में कंपनी पर यह जुर्माना लगाया है। यह हाल के सालों में किसी विदेशी कंपनी पर लगाए सबसे बड़े टैक्स जुर्मानों में से एक है। कंपनी ने इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देने की संभावना जताई है, जिसे टैक्स ट्रिब्यूनल या कोर्ट में ले जाया जा सकता है।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सैमसंग ने टेलीकॉम टावर उपकरणों को गलत तरीके से वर्गीकृत किया ताकि वह टैरिफ से बच सके। हालांकि, कंपनी का दावा है कि इन उपकरणों पर किसी भी प्रकार का कस्टम शुल्क लागू नहीं था।
कस्टम विभाग का दावा- सैमसंग ने 'जानबूझकर' गलत डॉक्यूमेंट्स दिखाए
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की 25 मार्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कस्टम अधिकारियों ने 8 जनवरी 2025 को जारी आदेश में सैमसंग के दावे को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि कंपनी ने भारतीय कानूनों का उल्लंघन किया और "जानबूझकर और इरादतन गलत दस्तावेज पेश किए" ताकि उसे कस्टम क्लीयरेंस में छूट मिल सके। इसके अलावा, कस्टम अधिकारियों ने सैमसंग के सात अधिकारियों पर कुल $81 मिलियन (लगभग ₹675 करोड़) का जुर्माना भी लगाया है।
पिछले साल के मुनाफे का बड़ा हिस्सा
यह टैक्स विवाद सैमसंग इंडिया के 2024 में हुए कुल $955 मिलियन (₹7,900 करोड़) के मुनाफे का बड़ा हिस्सा दिखाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद की जड़ें जनवरी 2023 में जारी किए गए एक नोटिस से जुड़ी हैं।
एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि, “सैमसंग को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन उसका उत्तर असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद कंपनी को प्री-डिमांड नोटिस जारी किया गया।” शुरुआत में ₹1,200 करोड़ का टैक्स मांगा गया था, लेकिन अब यह राशि बढ़कर ₹5,100 करोड़ हो गई है।
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