शापूरजी पलोनजी ग्रुप ने बनाई नई रियल एस्टेट कंपनी, जल्द ला सकती है ₹7,500 करोड़ का IPO

शापूरजी पलोनजी ग्रुप (Shapoorji Pallonji Group) ने देश भर में फैली अपनी रियल एस्टेट संपत्तियों को मैनेज करने के लिए एक नई होल्डिंग कंपनी बनाई है, जिसका नाम शापूरजी पलोनजी रियल एस्टेट (SPRE) रखा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की योजना इस कंपनी को पब्लिक करने की है, यानी आने वाले समय में SPRE का IPO भी लॉन्च किया जा सकता है

अपडेटेड Aug 20, 2024 पर 10:39 AM
SP ग्रुप की नई कंपनी अपने आईपीओ के तहत 10 से 12% हिस्सेदारी बिक्री के लिए रख सकती है

शापूरजी पलोनजी ग्रुप (Shapoorji Pallonji Group) ने देश भर में फैली अपनी रियल एस्टेट संपत्तियों को मैनेज करने के लिए एक नई होल्डिंग कंपनी बनाई है, जिसका नाम शापूरजी पलोनजी रियल एस्टेट (SPRE) रखा गया है। द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की योजना इस कंपनी को पब्लिक करने की है, यानी आने वाले समय में SPRE का IPO भी लॉन्च किया जा सकता है। यह कदम शापूरजी पलोनजी ग्रुप की एक महत्वपूर्ण रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे अपनी संपत्तियों को मोनेटाइज कर सकें और रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी पकड़ को और मजबूत कर सकें।

नई कंपनी का लक्ष्य वैल्यू अनलॉक करना, बिजनेस को सुव्यवस्थित करना और 2,000 एकड़ में फैले लैंड पार्सल सहित सभी रियल एस्टेट पोर्टफोलियो के मोनेटाइज का रास्ता साफ करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एसेट्स का मूल्य लगभग 6 अरब डॉलर है।

नई कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर वेंकटेश गोपालकृष्णन के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारी रणनीति बिजनेस को सुव्यवस्थित करने और शेयरधारकों के लिए एसेट्स बनाना है। इसी रणनीति के तहत एक इंटीग्रेटेड होल्डिंग कंपनी बनाने और उसके तहत एसेट्स को कंसॉलिडिटेड करने का फैसला किया गया है।"


मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।

SPRE में अब शापूरजी पलोनजी ग्रप का पूरा रियल एस्टेट पोर्टफोलियो शामिल है, जिसमें 45 लैंड पार्सल और प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। ये एसेट्स मुख्य रूप से 5 प्रमुख शहरों - मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, गुरुग्राम और कोलकाता में हैं। इसके अलावा कंपनी के पास मैसूर और नागपुर में भी बड़े लैंड पार्सल हैं।

गोपालकृष्णन ने कहा कि ग्रोथ के बाद पोर्टफोलियो में 2,00,000 करोड़ रुपये तक की रेवेन्यू पैदा करने की क्षमता है और कंसॉलिडेशन से कंपनी की बड़ी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की क्षमता भी बढ़ती है, जिससे निवेशकों में कंपनी को लेकर भरोसा बढ़ता है। साथ ही कंपनी पारदर्शिता के साथ अधिकतम रिटर्न सुनिश्चित करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने आईपीओ के तहत पहले चरण में 10 से 12 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए रख सकती है, जिसके बदले वह 80 से 90 करोड़ डॉलर (करीब 7,500 करोड़ रुपये) जुटाने की कोशिश करेगी। फिर बाद में धीरे-धीरे और हिस्सेदारी भी बेची जा सकेगी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।