A new Provision of Angel Tax: सरकार ने 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। इसमें उन स्टार्टअप्स (Startups) की 'घर वापसी' की बात कही गई, जो इंडियो छोड़कर विदेश शिफ्ट हो गए हैं। इसमें ऐसी कंपनियों को दोबारा इंडिया शिफ्ट होने के लिए कैपिटल फ्लो (Capital Flow) के नियमों और टैक्स सिस्टम (Tax System) में कई तरह के बदलावों की सलाह दी गई। स्टार्टअप्स और इनवेस्टर्स इसे बड़े बदलाव की पहली कड़ी के रूप में देख रहे थे। वे लंबे समय से प्राइवेट फर्मों में निवेश से होने वाले रिटर्न पर उसी रेट से टैक्स लगाने की मांग कर रहे थे, जो लिस्टेड कंपनियों में निवेश के रिटर्न पर लागू है। वे एंप्लॉयी स्टॉक ऑप्शंस के टैक्स के नियमों को आसान बनाने की भी मांग कर रहे थे।
लेकिन, अगले दिन यानी 1 फरवरी को पेश बजट में सरकार स्टार्टअप्स रिफॉर्म के मामले में रिवर्स गियर में चली गई। सरकार ने स्टार्टअप्स में विदेशी निवेश के नियमों को सख्त बना दिया। यह तब किया गया जब स्टार्टअप्स को फंड जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह दिक्कत जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही। बजट में कहा गया है कि तथाकथित एंजेल टैक्स रीजीम अब इंडियन स्टार्टअप्स में विदेश से होने वाले निवेश पर भी लागू होगी।
नियमों में इस बदलाव ने स्टार्टअप्स से लेकर वेंचर कैपिटल (VC) इनवेस्टर्स को चिंता में डाल दिया है। इससे स्टार्टअप्स की फंडिंग को लेकर मुश्किल बढ़ती दिख रही है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं:
एंजेल टैक्स रीजीम की शुरुआत 2012 में हुई थी। मनी लाउन्ड्रिंग को रोकने के मकसद से इसे लागू किया गया था। इसमें कहा गया है कि अगर कोई स्टार्टअप एंजेल इनवेस्टर्स से फंड जुटाता है और यह फंडिंग शेयर की फेयर वैल्यू से ज्यादा पर होती है तो इस पर टैक्स लगाया जा सकता है। टैक्स अथॉरिटीज इनवेस्टर्स की तरफ से चुकाए जाने वाले प्रीमियम को इनकम मानते हैं। इस पर करीब 31 फीसदी टैक्स लगता है।
पिछले कई सालों से इनवेस्टर्स और स्टार्टअप्स टैक्स अथॉरिटीज की तरफ से परेशान किए जाने की शिकायतें करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि सही इनवेस्टमेंट के मामलों में भी एंजेल टैक्स के नियमों को लागू किया जाता है। स्टार्टअप्स की शिकायत रही है कि 3 से 4 साल पहले जुटाए गए एजेंल इनवेस्टमेंट पर उन्हें टैक्स नोटिस मिलते हैं। कुछ मामलों में स्टार्टअप्स की तरफ से बतौर टैक्स चुकाए जाने वाला अमाउंट फंडिंग अमाउंट से ज्यादा रहा है।
एंजेल टैक्स का मामला 2019 में जब बहुत गरम था तब लोकलसर्किल्स ने एक सर्वे किया था। इसमें बताया गया था कि 50 लाख से 2 करोड़ रुपये के बीच कैपिटल जुटाने वाले 73 फीसदी से ज्यादा स्टार्टअप्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से एंजेल टैक्स नोटिस मिले थे।
अब तक स्टार्टअप्स के दो तरह के इनवेस्टर्स को एंजेल टैक्स से छूट हासिल थी। इनमें इंडिया में अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (AIF) के रूप में रजिस्टर्ड VC फर्म्स और सभी विदेशी इनवेस्टर्स शामिल थे। यूनियन बजट 2023 के फाइनेंस बिल में एक संशोधन के जरिए सरकार ने फॉरेन इनवेस्टर्स को मिली टैक्स छूट खत्म कर दी है। इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स के मुताबिक, इंडिया में स्टार्टअप्स में होने वाला 90 फीसदी इनवेस्टमेंट विदेश स्रोतों से होता है।
नियमों में बदलाव का क्या होगा असर?
विदेशी निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म हो जाने से स्टार्टअप्स की गतिविधियों पर निगेटिव असर पड़ेगा। उन्हें सैलरी एडवान्सेज, स्टॉक एमएंडए, सब्सिडियरी बनाने या ESOP ट्रस्ट में कंट्रिब्यूट करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। एक बड़ा असर यह हो सकता है कि एंजेल टैक्स के असर से बचने के लिए आंत्रप्रेन्योर्स विदेश में शिफ्ट होने की कोशिश कर सकते हैं, जहां इस तरह के टैक्स के नियम लागू नहीं हैं।
इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स का मानना है कि सरकार इस बारे में फिर से विचार करेगी। वीसी फंड्स को उम्मीद है कि वे स्पष्टीकरण जारी करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को मनाने में कामयाब हो जाएंगे। इस स्पष्टीकरण में यह कहा जाएगा कि विदेश में स्थिति वीसी फंड्स को नए नियमों से छूट हासिल होगी।