जोमैटो (Zomato) भी अब अपनी प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी (SWiggy) की राह पर चल पड़ी है। कंपनी ने अब प्रत्येक ऑर्डर पर 'प्लेटफॉर्म फीस' के नाम पर 2 रुपये चार्ज वसूलना शुरू कर दिया है। इसमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ग्राहक कितने रुपये का फूड ऑर्डर कर रहा है। Zomato ने यह फैसला ऐसे समय में किया है, जब वह हाल ही में पहली बार मुनाफे में आई है। यह अतिरिक्त फीस अभी केवल चुनिंदा यूजर्स के लिए ही लागू किया गया है और इसे जौमेटो की ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म ब्लिकिंट पर लागू नहीं किया गया है।
जोमैटो के प्लेटफॉर्म फीस पर क्लिक करने पर एक पॉप-अप खुलता है, जिसमें लिखा गया है, "यह एक छोटी सी फीस है, जो हमें बिलों का भुगतान करने में मदद करता है ताकि हम जोमैटो को चालू रख सकें" मनीकंट्रोल को दिए एक बयान में जोमैटो के प्रवक्ता ने कहा कि यह अभी एक प्रयोग है। "यह अभी एक प्रयोग के चरण में है, और हम इसे सभी के लिए लागू कर भी सकते हैं और नहीं भी।"
Zomato से करीब 4 महीने स्विगी ने अपने प्लेटफॉर्म फीस को लागू किया था। यह पहली बार था जब किसी फूड डिलीवरी कंपनी ने प्लेटफॉर्म को लागू किया था। स्विगी भी प्रत्येक ऑर्डर पर 2 रुपये प्लेटफॉर्म फीस के तौर पर लेती है।
जोमैटो का फिलहाल औसत ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू करीब 415 रुपये है। इसके मुकाबले यह 2 रुपये का फीस केवल 0.5% प्रतिशत है, जो किसी को भी मामूली फीस लग सकता है। हालांकि यह छोटी सी राशि जोमैटो के लिए एक बड़ा फंड ला सकती है।
जेपी मॉर्गन के एक नोट के अनुसार, जोमैटो पर जून तिमाही में करीब 17.6 करोड़ ऑर्डर आए, यानी एक दिन में लगभग 20 लाख ऑर्डर। इस हिसाब से कंपनी को हर दिन करीब 40 लाख रुपये और हर महीने करीब 12 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।
मनीकंट्रोल से बात करते हुए एक एनालिस्ट ने कहा, “अधिकतर ग्राहक ऑर्डर करते समय अपने कुल बिल में 2 रुपये की मामलू बढ़ोतरी पर ध्यान भी नहीं देगें। हालांकि जोमैटो पर हर रोज काफी बड़ी संख्या में ऑर्डर आते हैं। ऐसे में यह उसके लिए काफी बड़ी वैल्यू पैदा कर सकता है।"