भारत की दो प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों- Amazon और वॉलमार्ट की flipkart ने अपने प्लेटफॉर्म पर सेलर से मिलने वाले कमीशन को घटा दिया है। Moneycontrol को इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ये फैसला बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच लिया गया है। फ्लिपकार्ट ने जहां 300 रुपए से कम कीमत वाले प्रोडक्ट के लिए सेलर्स से कोई कमिशन नहीं लेने का वादा किया है, तो वहीं Amazon इस रेंज के प्रोडक्ट के लिए सेलर्स से फ्लैट 2% कमीशन लेगा।
इसके अलावा Flipkar पर 500 रुपए और Amazon पर 1000 रुपए की रेंज के कुछ प्रोडक्ट भी इस ऑफर के तहत आएंगे। इस कैटेगरी में ज्यादातर कपड़े, फैशन, ज्वेलरी और खिलौने शामिल हैं।
यह फैसला दोनों प्लेटफॉर्म ने एक महीने पहले ही अपनी फेस्टिव सीजन सेल खत्म होने के बाद लिया है। क्योंकि इस बीच एक युवा प्रतिद्वंद्वी और सॉफ्टबैंक समर्थित Meesho के नॉन-ब्रांडेड फैशन कैटेगरी वॉल्यूम बढ़ोतरी देखी गई है।
कंसल्टेंसी फर्म रेडसीर कंसल्टिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मीशो ने फेस्टिव सीजन सेल के दौरान किफायती और वैल्यू ऑफरिंग के दम पर फैशन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। अक्टूबर में सेल के पहले हफ्ते के दौरान, फैशन कैटेगरी ने ओवरऑल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) का लगभग 17% योगदान दिया।
Flipkart और Amazon को फैशन में 70% शेयर मिला, वहीं 30% सेल वर्टिकल अपैरल प्लेटफॉर्म से थी। इसमें से Meesho ने 39% शेयर हथिया लिया।
जहां Meesho ने सोशल कॉमर्स पर जोर देकर शुरुआत की थी, वहीं इसकी डायरेक्ट सेल्स में हिस्सेदारी बढ़ रही है, इसने इसे Flipkart और Amazon के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
अब यह अपने बिजनेस का 75 प्रतिशत सीधे अपने प्लेटफॉर्म पर आने वाले ग्राहकों से लेता है, जबकि 25 प्रतिशत रिसेलर से आता है। सेलर के अनुसार, Meesho उनसे कोई कमीशन नहीं ले रहा था, इसने उन्हें कंज्यूमर को प्राइज़ बेनिफिट देने के लिए पर्याप्त मार्जिन दिया।
नतीजतन, एक ही प्रोडक्ट Amazon, Flipkart और Meesho में अलग-अलग कीमतों पर बेचा जा रहा था, जबकि Meesho बाकी दो की तुलना में काफी सस्ता था। कमीशन कम करने के इस फैसला का मकसद कीमत को लेकर दुकानदारों को मीशो की ओर जाने से रोकना है।