Byju’s के संकट के बाद देश की टॉप वेंचर कैपिटल फर्म ने बदली निवेश की रणनीति

देश की प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म Blume Ventures अब निवेश की अपनी रणनीति को लेकर ज्यादा सर्तक हो गई है। Blume Ventures 62.5 करोड़ डॉलर का एसेट मैनेज करती है। वेंचर कैपिटल फर्म अब उन कंपनियों में निवेश से बच रही है, जहां बेहतर परफॉर्मेंस की संभावना नहीं है। ब्लूम वेंचर्स के को-फाउंडर कार्तिक रेड्डी का कहना है कि फर्म अब अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों के प्रॉफिट पर फोकस करना चाहती है

अपडेटेड Jul 07, 2023 पर 4:01 PM
2021 के बाद से धीरे-धीरे स्टार्टअप के लिए फंडिंग की मुश्किल होने लगी।

एजुकेशन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप Byju’s में पैदा हुए संकट के बाद देश की प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म ब्लूम वेंचर्स (Blume Ventures) अब निवेश की अपनी रणनीति को लेकर ज्यादा सर्तक हो गई है। ब्लूम वेंचर्स 62.5 करोड़ डॉलर का एसेट मैनेज करती है।

वेंचर कैपिटल फर्म अब उन कंपनियों में निवेश से बच रही है, जहां बेहतर परफॉर्मेंस की संभावना नहीं है। ब्लूम वेंचर्स के को-फाउंडर कार्तिक रेड्डी का कहना है कि फर्म अब अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों के प्रॉफिट पर फोकस करना चाहती है। उनके मुताबिक, पिछले एक साल में फर्म के पोर्टफोलियो में शामिल एक तिहाई कंपनियों में उतार-चढ़ाव रहा है। इनमें ई-कॉमर्स और मोबिलिटी फर्में शामिल हैं।

भारत की प्रमुख स्टार्टअप फर्म Byju’s फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रही है। कंपनी तय समयसीमा के भीतर फाइनेंशियल स्टेटमेंट उपलब्ध कराने में नाकाम रही और उसने 1.2 अरब डॉलर का लोन भी नहीं चुकाया है। इस वजह से कंपनी बोर्ड के कुछ सदस्यों और ऑडिटर ने हाल में इस्तीफा दे दिया था।


रेड्डी ने बताया, 'Byju’s में मचे इस उथल-पुथल की वजह से पूरे स्टार्टअप सिस्टम में इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि हर पोर्टफोलियो कंपनी में क्या गड़बड़ी हो सकती है। रेड्डी की वेंचर कैपिटल फर्म ने Byju’s की प्रतिद्वंद्वी कंपनी अनअकैडमी (Unacademy) के साथ-साथ कई कंज्यूमर स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।

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Byju’s के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी फिलहाल इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। पिछले साल Byju’s की वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर थी। हालांकि, पिछले महीने कंपनी के अहम इनवेस्टर Prosus NV ने अपनी स्टेक की वैल्यू कम कर दी थी और इसके बाद Byju’s की

टोटल वैल्यूएशन 5.1 अरब डॉलर हो गई।

साल 2021 में वेंचर कैपिटल बूम का दौर रहा। इसके बाद से धीरे-धीरे स्टार्टअप के लिए फंडिंग की मुश्किल होने लगी। इकनॉमी में आई सुस्ती, ब्याज दरों और महंगाई दर में बढ़ोतरी से वेंचर इनवेस्टर अपने कदम खींचने लगे। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने 2023 की पहली छमाही में 5.4 अरब डॉलर जुटाए, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 70 पर्सेंट कम है। साल 2022 में भी स्टार्टअप फंडिंग में गिरावट हुई थी। 2022 में स्टार्टअप को 27 अरब डॉलर की फंडिंग मिली, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 43 अरब डॉलर था।

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