क्या आप भी फटाफट कमाई के लिए Trade 26 Research की मदद ले रहे? जानिए क्या है पूरा मामला नहीं तो हो सकता है बड़ा लॉस

किसी संस्था या फर्म को इनवेस्टमेंट से जुड़ी सेवाएं देने के लिए सेबी में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। उसका दर्जा म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस या अल्टरनेविट इनवेस्टमेंट फंड का हो सकता है। तभी वह निवेशक के पैसे का प्रबंधन कर सकती है। ऐसी कंपनियों को सेबी के तय नियमों का पालन करना पड़ता है। हालांकि, ऐसी किसी संस्था या कंपनी को इनवेस्टर या क्लाइंट के ट्रेडिंग अकाउंट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है

अपडेटेड Jul 07, 2023 पर 3:21 PM
कुछ मनी मैनेजर्स सेबी के सख्त नियमों से बचने के लिए दूसरे तरीके निकाल लेते हैं। वे खुद को सेबी में रजिस्टर्ड नहीं कराते हैं लेकिन इनवेस्टर्स के ट्रेडिंग अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं।

अगर आप नए निवेशक हैं और फटाफट मार्केट से पैसा बनाना चाहते हैं तो आपको Trade 26 Research अपना शिकार बना सकती है। इस कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर खुद को एक स्टॉक एडवायजरी फर्म बताया है। यह कंपनी बनारस में है। इसने कई पेमेंट प्लांस के साथ स्टॉक और कमोडिटीज में इनवेस्टमेंट आइडियाज का विज्ञापन दिया है। इसकी वेबसाइट पर भरने के लिए KYC फॉर्म, रिस्क डिसक्लोजर्स और डिसक्लेमर डॉक्युमेंट्स दिखेंगे। इस कंपनी ने खुद के SEBI में रजिस्टर्ड होने का भी दावा किया है। हालांकि, उसने अपने कानूनी दर्जे के बारे में कुछ नहीं बताया गया है।

क्या है काम करने का तरीका?

अपने डिसक्लेमर पेज पर उसने खुद को एक रजिस्टर्ड एडवाइजर बताया है। हैरान करने वाली बात यह है कि Trade 26 Research एक बड़ी और लिस्टेड ब्रोकरेज फर्म के तहत काम करती है। लेकिन, इसके सेल्स एक्जिक्यूटिव ने इस बात की पुष्टि की है हि वह सेबी में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट या इनवेस्टमेंट एडवाइजर नहीं है। इसके बावजूद यह एडवायजरी सर्विसेज देती है। यह रजिस्टर्ड मनी मैनेजर नहीं है लेकिन यह इनवेस्टर्स के पैसे का प्रबंधन करती है। यह इनवेस्टर्स के ट्रेडिंग अकाउंट की लॉग-इन और पासवर्ड ले लेती है और अकाउंट के जरिए ट्रेड के ऑर्डर प्लेस करती है।


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सेबी का नियम क्या कहता है?

किसी संस्था या फर्म को इनवेस्टमेंट से जुड़ी सेवाएं देने के लिए सेबी में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। उसका दर्जा म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस या अल्टरनेविट इनवेस्टमेंट फंड का हो सकता है। तभी वह निवेशक के पैसे का प्रबंधन कर सकती है। ऐसी कंपनियों को सेबी के तय नियमों का पालन करना पड़ता है। हालांकि, ऐसी किसी संस्था या कंपनी को इनवेस्टर या क्लाइंट के ट्रेडिंग अकाउंट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है।

SEBI के नियम से बचने का तरीका

कुछ मनी मैनेजर्स सेबी के सख्त नियमों से बचने के लिए दूसरे तरीके निकाल लेते हैं। वे खुद को सेबी में रजिस्टर्ड नहीं कराते हैं लेकिन इनवेस्टर्स के ट्रेडिंग अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। वे इस अकाउंट से ट्रेडिंग करते हैं। इनवेस्टर्स ऐसे मनी मैनेजर्स की सेवाएं इसलिए लेते हैं क्योंकि उन्हें इतना ज्यादा रिटर्न मिलने का वादा किया जाता है जो दूसरी जगह मुमकिन नहीं होगा। Trade 26 रिसर्च ने इस रिपोर्टर को रोजाना 10 फीसदी रिटर्न का वादा किया। इसका मतलब है कि एक इनवेस्टर 20,000 रुपये के निवेश से एक दिन में 2000 रुपये प्रॉफिट कमा सकता है। यह एक महीने में 300 फीसदी और एक साल में 3,650 फीसदी रिटर्न होता है।

प्रॉफिट शेयरिंग का भी वादा

सेल्स एग्जिक्यूटिव ने इस रिपोर्ट से कहा कि प्रॉफिट को 70:30 के अनुपात में बांटा जाएगा। इसका मतलब है कि 70 फीसदी प्रॉफिट इनवेस्टर के पास जाएगा। लेकिन, नुकसान की स्थिति में इनवेस्टर को 100 फीसदी लॉस उठाना होगा। इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। सुनने में ऐसा लगता है कि यह फ्रॉड की कोशिश हो सकती है। लेकिन, सेल्स एग्जिक्यूटिव का यह दावा हैरान करता है कि यह कंपनी एक लिस्टेड और बड़ी ब्रोकरेज फर्म की सब-ब्रोकर के रूप में काम करती है। हम इसकी स्वतंत्र रूप से जांच नहीं कर पाए, लेकिन मार्केट की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि इनवेस्टर्स को अट्रैक्ट करने के लिए यह ब्रोकरेज फर्मों की तरफ अपनाई जाने वाली सामान्य प्रैक्टिस है।

निवेशकों को सावधन रहने की जरूरत

लेकिन, एक बात तय है कि इनवेस्टर्स खासकर नए निवेशकों को ऐसी कंपनियों और उनके दावों की असलियत को समझने की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति या कंपनी आपको ज्यादा रिटर्न दिलाने का दावा करती है तो उस पर भरोसा नहीं करने की जरूरत है। शेयर मार्केट में जब तेजी होती है तो ऐसा फ्रॉड करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ जाती है। इसकी वजह यह है उन्हें पता होता है कि मार्केट के ऑल-टाइम हाई पहुंचते है लोगों में शेयरों में निवेश करने की दिसचस्प बढ़ जाती है।

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