दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने शुक्रवार 11 अगस्त को मद्रास हाई कोर्ट में बताया कि वह 18 अगस्त तक अपने 'प्लेस्टोर (Playstore)' से उन स्टार्टअप्स के मोबाइल एप्लिकेशन को नहीं हटाएगा, जिन्होंने उसकी इन-ऐप बिलिंग पॉलिसी को चुनौती दी हुई है। गूगल ने यह वादा ऐसे समय में किया जब कोर्ट, स्टार्टअप्स की अपील याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। स्टार्टअप्स ने गूगल की प्लेस्टोर पॉलिसीज के खिलाफ पहले सिंगल-जज वाले बेंच के पास याचिका लगाई थी, जिसने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद स्टार्टअप ने सिंगल-जज बेंच के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल किया।
हाई कोर्ट की 2-जजों की बेंच ने इस मामले में गूगल को नोटिस जारी किया है और कहा कि वह अंतरिम आदेश के लिए स्टार्टअप्स की याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई करेगी।
गूगल की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट साजन पूवैया ने अदालत से कहा कि वह इस बात पर जवाब दाखिल करेंगे कि स्टार्टअप्स को अंतरिम आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। वहीं सीनियर एडवोकेट और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस मामले में स्टार्टअप्स का प्रतिनिधित्व किया।
भारत मैट्रिमोनी (Bharat Matrimony), शादी.कॉम (Shaadi.com) और अनएकेडमी (Unacademy) जैसे स्टार्टअप और टेक कंपनियों ने गूगल की ऐप बिलिंग पॉलिसी के खिलाफ 16 याचिकाएं दाखिल की थी, जिसमें से 14 याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। मद्रास हाई कोर्ट की 2 जजों की बेंच इन्हीं याचिकाओं को खारिज करने के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाओं को खारिज करते समय कोर्ट ने कहा था कि कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के अधिकार क्षेत्र में आता है। जो 2 याचिकाएं नहीं खारिज हुई हैं, उनमें डिज्नी+हॉटस्टार और एग्जाम की तैयारी कराने वाले 'टेस्टबुक' की ओर से दाखिल याचिकाएं शामिल हैं और इनके भी खारिज होने की संभावना है।
कोर्ट के अनुसार, चूंकि स्टार्टअप्स ने गूगल पर उसके दबदबे के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है, इसलिए CCI को इस मामले का फैसला करना चाहिए।