सरकार ChatGPT जैसी एक चैटबोट हेल्पलाइन बना रही है। इसका इस्तेमाल उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे के लिए हो सकता है। मामले से जुड़े लोगों के यह जानकारी दी है। दरअसल, सरकार एक ऐसा टूल तैयार करना चाहती है, जिससे अगल-अलग भाषाओं में कंज्यूमर्स ऑडियो मैसेज के जरिए बातचीत कर सकेंगे। यह चैटबोट (Chatbot) पिछले महीने उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए लॉन्च किए चैटबोट से अलग है। यह चैटबोट बातचीत के मामले में उतना इफेक्टिव नहीं है। इसकी वजह यह है कि यह यूजर्स को एक सामान्य बातचीत की तरह डिटेल देने को नहीं कहता है। यह उन्हें कई स्टेप्स में ऑप्शंस सेलेक्ट करने को कहा है। इसमें कई तरह की जानकारियां देनी पड़ती है।
हो रहा भाषिनी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
सूत्रों ने बताया कि नए टूल के लैंग्वेज पार्ट के लिए सरकार के भाषिनी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) तलाशने में दिक्कत आ रही है। जब आप किसी कंवरसेशनल AI चैटबोट से बातचीत करते हैं तो LLM आपकी बातों को समझने में मदद करता है। उसकी मदद से AI आपके टेक्स्ट को समझ पाता है। वह आपके शब्दों के मतलब को अलग-अलग हिस्सों में बांटता है। उसके बाद वह रिस्पॉन्स के लिए एक कॉन्टेक्स्ट तैयार करता है।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, "अलग-अलग कंपनियों ने जो लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स तैयार किए हैं, वह हमारे लिए उपयोगी साबित नहीं होंगे। इसके लिए ऐसे LLM की जरूरत है जो कंज्यूमर के मसले और कानूनों के छोटे-छोटे फर्क को समझ सके।" उदाहरण के लिए कंज्यूमर डोमेन का एक बड़ा मसला सरोगेट एडवर्टाइजिंग है। अगर कंज्यूमर अपनी शिकायत में सरोगेट शब्द का इस्तेमाल करता है तो चैटबोट अलग संदर्भ में सरोगेशी का इस्तेमाल कर सकता है।
अलग-अलग स्थितियों में रिस्पॉन्स बड़ी चुनौती
डोमेन-स्पेसिफिक डेटा पर बनाए गए LLM के पास किसी खास डोमेन में इस्तेमाल किए गए लैंग्वेज का ज्यादा एक्सपोजर होता है। इससे उसे डोमेन और संदर्भ के बीच के अंतर को फर्क को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। यह समझा जाता है कि मेडिकल डेटा पर तैयार एक लैंग्वेज मॉडल मेडिकल से जुड़े शब्दों को आसानी से समझ लेगा। यह जनरल लैंग्वेज डेटा के मुकाबले मेडिकल रिलेटेड सावलों के जवाब ज्यादा बेहतर तरीकों से दे सकता है।
दूसरे सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए भी चैटबोट का इस्तेमाल
सरकार अपने दो दूसरे प्रोजेक्ट्स-लोकल लैंग्वेज में स्कूल एजुकेशन के लोकतांत्रिकरण और सरकारी स्कीमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रही है। पहले के लिए यह चैटजीपीटी के इस्तेमाल से एक एजुकेशनल टूल बना रही है। इसका इस्तेमाल जल्द स्कूल के स्टूडेंट्स कर सकेंगे। उन्हें अपनी भाषा में स्कूल के कुरिकुलम से जुड़े सवालों के जवाब मिलेंगे।