Digital personal data protection bill: सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल (Digital personal data protection bill) का ड्राफ्ट पेश कर दिया है। इसका लंबे समय से इतंजार हो रहा था। इसमें नियमों का पालन नहीं करने पर 500 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
इस ड्राफ्ट में सिर्फ पर्सनल डेटा (personal data) पर फोकस रखा गया है। नॉन-पर्सनल डेटा को इस ड्राफ्ट बिल के दायरे से बाहर रखा गया है। इस ड्राफ्ट बिल में एक डेट प्रोटेक्शन रेगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव है।
इस ड्राफ्ट बिल पर सरकार व्यापक विचार-विमर्श चाहती है। उसके बाद इसे अगले बजट सेशन में संसद में पेश करने का प्लान है। इसमें data fiduciary के बारे में कही बातें कही गई हैं। Data fiduciary का मतलब उस कंपनी या संस्था से है, जो यूजर के डेटा का इस्तेमाल करेगी। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि यूजर को अपनी जानकारियों को शेयर करने की सहमति वापस लेने का अधिकार होगा। उसके पास अपनी जानकारियों के इस्तेमाल की इजाजत देने का भी अधिकार होगा।
उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति अपना सेविंग्स बैंक अकाउंट बंद करता है तो बैंक को अकाउंट से जुड़ी उसकी सभी जानकारियां डिलीट करना होगा। इसी तरह अगर कोई यूजर सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर अपने अकाउंट को डिलीट करता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसकी सभी जानकारियां डिलीट करनी होगी।
इस बिल में कहा गया है कि data fiduciary को किसी व्यक्ति का पर्सनल डेटा तभी तक अपने पास रखना होगा, जब तक यूजर की जरूरत के लिहाज से उसे रखने की इजाजत उसे होगी। इस बिल में कहा गया है कि डेटा रखने वाली कंपनी या संस्था (data Fiduciary) बच्चों के व्यवहार की मॉनेटरिंग नहीं कर सकेगी। वह बच्चों को केंद्र में रख कोई एडवर्टाइजमेंट भी नहीं कर सकेगी।
किसी बच्चे के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल करने से पहले कंपनी या संस्था को उसके मातापिता की इजाजत लेनी होगी। अगर बच्चों से जुड़े इन प्रावधानों का पालन कोई कंपनी या संस्था नहीं करती है तो उस पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि डेटा का इस्तेमाल करने वाली कंपनी या संस्था पर यूजर की किसी शिकायत का सही तरीके से निपटारा करने की जिम्मेदारी होगी।