सरकार घरेलू क्लाउड-टेक्नोलॉजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की मदद करने का प्लान बना रही है। इसका मकसद Microsoft Azure, Amazon Web Services और Google Cloud जैसी दिग्गज कंपनियों से मुकाबले में घरेलू कंपनियों की मदद करना है। यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी राजीव चंद्रशेखरन से यह जानकारी मिली है। सरकार यह प्लान तब बना रही है, जब पहले से ही ये दिग्गज कंपनियां ग्रोथ के लिए संघर्ष कर रही हैं। एनुअल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू घटने की वजह से इन कंपनियों की ग्रोथ सिंगल डिजिट में रही है। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में क्लाउड स्पेंडिंग में टेक्नोलॉजी कंपनियों का खर्च घटा है।
कंज्यूमर को विकल्प देना चाहती है सरकार
हालांकि, इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का मानना है कि इंडिया और दूसरे एशियाई देशों सहित उभरते बाजारों में क्लाउड कंप्यूटिंग की डिमांड अच्छी बनी हुई है। इन इलाकों में न्यू-एज टेक्नोलॉजी कंपनियों की तरफ से इसकी अच्छी मांग आ रही है। चंद्रशेखरन ने 16 मार्च को ट्वीट में बताया, "हमें यह बात पंसद नहीं है कि अभी इंडिया में क्लाउड में Azure, Amazon और गूगल जैसी तीन बड़ी कंपनियों का दबदबा है। हम चाहते हैं कि कंज्यूमर के पास ज्यादा विकल्प होना चाहिए।"
सरकार नया इनसेंटिव प्लान लाएगी
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि एंटरप्राइजेज के पास भी ज्यादा च्वॉइस होनी चाहिए...पक्के तौर पर एक इनसेंटिव प्रोग्राम आ रहा है। हम ऐसा प्रोग्राम लाने जा रहे हैं जिसमें हम डोमेस्टिक क्लाउड इनोवेटर्स को पब्लिक क्लाउड क्रिएट करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।" सरकार की यह इनसेंटिव स्कीम 15,000 करोड़ रुपये के उस प्लान से अलग होगी, जिसके तहत इंडिया में डेटा सेंटर्स स्थापित करने वाली कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
तेजी से बढ़ रहा क्लाउड का बाजार
चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि सरकार क्लाउड टेक्नोलॉजी की अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए प्राइवेट कंपनियों की सेवाएं लेगी। इसके लिए एक टेंडर लॉन्च किया जाएगा। इंडिया में पब्लिक क्लाउड सर्विसेज का कुल मार्केट 2026 तक बढ़कर 13 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। 2021 से 2026 के बीच इसका विस्तार 23.1 फीसदी CAGR से होने की उम्मीद है। यह डेटा रिसर्च फर्म IDC का है। 2022 की पहली छमाही में मार्केट रेवेन्यू 2.8 अरब डॉलर रहा है। क्लाउड का मार्केट न सिर्फ इंडिया में बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है।