PhonePe के CEO ने कहा, सरकार की नीतियों की वजह से पेमेंट कंपनियों के लिए पैसा कमाना मुश्किल

फोनपे के CEO समीर निगम का कहना है कि पेमेंट इकोसिस्टम में बाजार से जुड़ी खामियां हैं। कंपनियां पैसे जुटाती हैं, लेकिन पैसे कमाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। पेमेंट सेगमेंट में अभी भी सबसे ज्यादा प्रॉफिट सरकारी इकाई NPCI कमा रही है। NPCI का प्रॉफिट, ज्यादातर पेमेंट्स कंपनियों के प्रॉफिट को एक साथ मिलाने के बाद मौजूद कुल रकम से भी ज्यादा होगा

अपडेटेड Jul 19, 2023 पर 5:48 PM
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मनीकंट्रोल के स्टार्टअप कॉनक्लेव में PhonePe के CEO समीर निगम (बाएं) और Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामत ने अपने-अपने कारोबार से जुड़े मुद्दों पर बात की।

डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे ( PhonePe) के CEO समीर निगम का कहना है कि पेमेंट सेगमेंट में अभी भी सबसे ज्यादा प्रॉफिट नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI ) कमा रही है। उनका कहना था कि NPCI का प्रॉफिट, ज्यादातर पेमेंट्स कंपनियों के प्रॉफिट को एक साथ मिलाने के बाद मौजूद कुल रकम से भी ज्यादा होगा। निगम ने मनीकंट्रोल के स्टार्टअप कॉनक्लेव में यह बात कही। इस मौक पर Zerodha (जेरोधा) के को-फाउंडर नितिन कामत भी मौजूद थे।

निगम का यह भी कहना था कि पेमेंट इकोसिस्टम में बाजार से जुड़ी खामियां हैं। प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां पैसे जुटाती हैं, लेकिन पैसे कमाना (मॉनेटाइजेशन) काफी मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा, 'कहने का मतलब यह है कि समाज के कल्याण से इतर बात की जाए तो आपकी कंपनी के लिए कोर बिजनेस से पैसे कमाना मुश्किल है। देश में कुल 70 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं, जिन तक हमें डिजिटल पेमेंट की सुविधा पहुंचानी है। हालांकि, इस इंडस्ट्री के कुछ खिलाड़ियों को छोड़ दिया जाए, तो इस बिजनेस से पैसा बनाना काफी मुश्किल है। दरअसल, पिछले साल सबसे ज्यादा प्रॉफिट पूल NPCI का रहा।'

NPCI की स्थापना रिजर्व बैंक (RBI) की मदद से एक नॉन-प्रॉफिट संस्थान के तौर पर की गई है और इसका मकसद IMPS, UPI और UPI जैसे पेमेंट सिस्टम को चलाना है। फाइनेंशियल ईयर 2022 में NPCI का प्रॉफिट 773 करोड़ रुपये रहा।

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निगम दरअसल पेमेंट इंडस्ट्री की उस मांग को दोहरा रहे थे, जिसमें पेमेंट की सुविधा मुहैया कराने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या कमीशन को बहाल करने की मांग की जा रही है। देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने MDR को वापस ले लिया है, जिससे छोटे कारोबारियों को UPI पेमेंट अपनाने में मदद मिली है।

निगम का कहना था कि पेमेंट इकोसिस्टम में यह भी विवाद का विषय है कि ग्राहक जहां फीस भुगतान करने को तैयार हैं, वहीं सरकार प्राइवेट कंपनियों को किसी सर्विस या प्रॉडक्ट के लिए फीस नहीं वसूलने को बाध्य कर रही है। उन्होंने कहा, '70 करोड़ लोगों का बाजार है और वे पेमेंट भी करना चाहते हैं, लेकिन सरकार कहती है कि कंपनियां चार्ज नहीं वसूल सकती हैं। इससे कंपनियों के प्रॉफिट पर काफी दबाव है।'

स्टॉकब्रोकिंग फर्म जेरोधा के को-फाउंडर और CEO नितिन कामत ने कहा कि रेवेन्यू पूल का दायरा टॉप 1-3 पर्सेंट खिलाड़ियों के बीच सिमटा हुआ है। उनहोंने कहा, 'हम भारतीयों को एफडी और सेविंग से अलग हटकर आंत्रप्रेन्योर्स की मदद के लिए सोच विकसित करनी होगी। इस देश में संपत्ति का निर्माण ज्यादा समावेशी तरीक से होना चाहिए।'

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