Indian Startup System: दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंडिंग का माहौल कैसा है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि 2014 के बाद से सॉफ्टबैंक (Softbank) ने इस साल जून तक यहां कोई निवेश नहीं किया है। वहीं एक और दिग्गज निवेशक टाइगर ग्लोबल (Tiger Global) की बात करें तो इस साल इसने जितने सौदे किए हैं, वह पिछले पांच साल में सबसे कम है। Tracxn पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सॉफ्टबैंक ने इससे पहले जुलाई 2022 में आखिरी बार देश में निवेश किया था जबकि टाइगर ग्लोबल ने इस साल सिर्फ दो डील में हिस्सा लिया है। पिछले साल की पहली छमाही में इसने 300 करोड़ डॉलर की 39 डील की थी और सॉफ्टबैंक ने 60 करोड़ डॉलर की चार डील की थी। बता दें कि इन दोनों ने पिछले नौ साल में यहां 1800 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश किए हैं।
SoftBank का मानना, यहां जरूरत से ज्यादा कर लिया गया अनुमान
कोरोना महामारी के दौरान अनुमान लगाया गया था कि भारत में ग्रोथ की काफी गुंजाइश है। हालांकि डिजिटल सर्विसेज अपनाने की रफ्तार अनुमान से भी कम रही। इस वजह से निवेशक अब यहां के इंटरनेट मार्केट की वास्तविक क्षमता को लेकर संदेह करने लगे हैं। हाल ही में मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के सीईओ और इसके सीईओ मासायोशी सोन के भरोसेमंद सहयोगी राजीव मिश्र ने कहा था कि भारत में ग्रोथ की गुंजाइश को लेकर यकीनन निवेशकों ने उम्मीद से काफी अधिक अनुमान लगा लिया था।
राजीव के मुताबिक यहां सिर्फ 6-7 करोड़ या 10 करोड़ लोग ही डिजिटल सर्विसेज अफोर्ड कर सकते हैं यानी कि इसका बाजार यहां बहुत बड़ा नहीं है। देश के सबसे अधिक मुनाफे वाली नए दौर की टेक स्टार्टअप जीरोधा के सीईओ और को-फाउंडर नितिन कामत के साथ-साथ देश की सबसे अधिक वैल्यू वाली फिनटेक कंपनी फोनपे के को-फाउंडर और सीईओ समीर निगम का भी ऐसा मानना है। नितिन और समीर ने बंगलूरु के मनीकंट्रोल स्टार्टअप कॉन्क्लेव में आयोजित पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया था और यहां दोनों ही इस बात पर सहमत हुए थे कि यहां स्टार्टअप्स का बाजार सिर्फ 10 करोड़ लोगों के लिए ही है।
भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यूनीकॉर्न इकोसिस्टम है लेकिन पिछले 10 महीने में भी एक भी नया यूनीकॉर्न नहीं बना है। यूनीकॉर्न का मतलब 100 करोड़ डॉलर से अधिक वैल्यू वाला स्टार्टअप है और इसकी संख्या देश में 107 है। सॉफ्टबैंक के राजीव का कहना है कि भारत में किसी नए निवेश पर विचार नहीं हो रहा है लेकिन किसी में निवेश है तो उसमें और निवेश किया जा सकता है। हालांकि उनका यह भी कहना कि इसके लिए पहले स्टार्टअप को अपनी वैल्यू फिर से तय करनी होगी, नहीं तो उन्हें पैसा नहीं मिलेगा। अमेरिकी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) ने मीशो, बायजूज, फार्माईजी, पाइन लैब्स और स्विगी जैसे स्टार्टअप्स की फेयर वैल्यू को कम कर दिया है।