विवादों में घिरे फिनटेक स्टार्टअप भारतपे (Bhartpe) में हुए हालिया घटनाक्रम को लेकर कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (Ministry of Corporate Affairs) एक प्रारंभिक जांच शुरू करने का आदेश दे सकती है। बिजनेस टूडे ने एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
एक ऑडियो लीक से भारतपे में हुई थी विवाद की शुरुआत
भारतपे में पिछले दो महीनों में कई नाटकीय घटनाक्रम देखे गए हैं। इन विवादों की शुरुआत कंपनी के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के एक कथित ऑडियो लीक से हुई थी, जिसमें वह कथित तौर पर कोटक के एक कर्मचारी से अभद्र तरीके से बात कर रहे थे।
ऑडियो टेप का मामला तूल पकड़ने के बाद भारतपे के बोर्ड (Bhartpe Board) ने अशनीर ग्रोवर और कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी और कंपनी की हेड ऑफ कंट्रोल्स माधुरी जैन को छुट्टी पर भेज दिया। साथ ही बोर्ड ने कंपनी के वर्क कल्चर और अन्य चीजों को लेकर इंटरनल ऑडिट कराने का फैसला किया।
अशनीर ग्रोवर ने अपनी हिस्सेदारी के मांगे 4,000 करोड़ रुपये
बाद में अशनीर ग्रोवर ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा कि बोर्ड उन्हें जबरन कंपनी से बाहर निकालना चाहता है। अशनीर ग्रोवर ने कहा था कि अगर बोर्ड उन्हें कंपनी से बाहर करना चाहता हैं तो उन्हें उनकी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
फॉरेंसिक ऑडिट में फ्रॉड की बात आई सामने
इस बीच फॉरेंसिंक ऑडिट रिपोर्ट में अशनीर ग्रोवर और उनके परिवार पर कंपनी के फंड का व्यापक दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। ग्रोवर ने अपने बचाव में सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में भी याचिका डाली थी कि उनके खिलाफ कॉरपोरेट गवर्नेंस की जांच ना हो। हालांकि उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
BharatPe ने अशनीर ग्रोवर को निकाला
भारतपे ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर पहले माधुरी जैन और फिर अशनीर ग्रोवर को कंपनी के सभी पदों से हटा दिया। यहां तक कि न ने अशनीर ग्रोवर से कंपनी का कोफाउंडर कहे जाने का अधिकार भी छीन लिया। साथ ही कंपनी ने कहा कि वह इस मामले में अशनीर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर सकती है।
अब अशनीर ग्रोवर और भावकि कोलाडिया के बीच विवाद
इस बीच BharatPe में अब एक और नया विवाद खड़ा होता दिख रहा है। यह विवाद कंपनी के मूल फाउंडर भाविक कोलाडिया की हिस्सेदारी को लेकर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भाविक कोलाडिया ने अशनीर ग्रोवर और शाश्वत नकरानी के साथ मिलकर BharatPe को शुरू किया था। हालांकि अमेरिका में एक क्रेडिट कॉर्ड फ्रॉड से जुड़े मामले में भाविक कोलाडिया को दोषी पाए जाने के बाद उनकी हिस्सेदारी अशनीर ग्रोवर और शाश्वत नकारानी के बीच एक समझौते के तहत बांट दी गई थी।
भारतपे नहीं करेगा हस्तक्षेप
अशनीर ग्रोवर के कंपनी से निकलने के बाद अब सवाल यह खड़ा हुआ है कि भाविक कोलाडिया की हिस्सेदारी उन्हें वापस कैसे लौटाई जाए। अशनीर ग्रोवर ने कई मौकों पर साफ कहा कि वह अपनी हिस्सेदारी नहीं छोड़ने वाले हैं। ऐसे में भाविक कोलाडिया अब अपनी हिस्सेदारी अशनीर से वापस पाने के लिए कानूनी फर्मों की सलाह ले रहे हैं। इस बीच भारतपे के बोर्ड ने साफ किया है वह कंपनी में भाविक की हिस्सेदारी को लेकर उठे नए विवाद में हस्तक्षेप नहीं करने जा रहा है।