MPL Layoffs: मोबाइल प्रीमियम लीग (MPL) ने अपने करीब 350 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। यह भारत में इसके कुल कर्मचारियों की संख्या का 50 फीसदी है। इस मामले से वाकिफ लोगों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। MPL एक ई-स्पोर्ट्स और स्किल गेमिंग स्टार्टअप है जिसने अब यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुकी है। MPL ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब जीएसटी काउंसिल ने ऑनलाइन-गेमिंग में लगने वाली पूरी राशि पर 28 फीसदी की भारी भरकम टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। इसमें स्किल आधारित गेम और चांस आधारित गेम के बीच कोई अंतर नहीं किया गया है। अभी तक यह गेमिंग कंपनियां वर्तमान में प्लेटफॉर्म शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करते हैं।
MPL के को-फाउंडर्स साई श्रीनिवारस और शुभ मल्होत्रा ने कर्मचारियों को लिखे एक लेटर में कहा, "नए नियमों के चलते हमारा टैक्स बोझ 350 से 400 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। एक कंपनी के रूप में, कोई 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के लिए तैयारी कर सकता है, लेकिन इतनी बढ़ी बढ़ोतरी या बोझ को सहने के लिए हमें कई ऐसे कुछ बहुत कठिन फैसले करने की जरूरत है।"
मनीकंट्रोल ने इस लेटर की एक कॉपी दिखी है। को-फाउंडर्स ने एक लेटर में कहा कि कंपनी के वेरिएबल कॉस्ट में मुख्य रूप से कर्मचारी, सर्वर और ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। कंपनी ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपने सर्वर और ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत पर दोबारा गौर करने का काम शुरू कर दिया है।
श्रीनिवास ने कहा, "इसके बावजूद, हमें अभी भी अपनी लोगों से जुड़ी लागतों को कम करना होगा।"
बेंगलुरु मुख्यालय वाले इस स्टार्टअप में लगभग एक साल में यह छंटनी का दूसरा दौर है। इसने मई 2022 में 100 से अधिक लोगों को जाने दिया और इंडोनेशियाई बाजार से बाहर निकल गया। पिछले साल सितंबर में कथित तौर पर 15 करोड़ डॉलर जुटाने के बाद MPL का वैल्यूएशन 2.3 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसके बाद इसे यूनिकॉर्न क्लब में भी एंट्री की थी।