Nykaa, Policybazaar, Paytm और Delhivery के 159.67 करोड़ शेयरों में लॉक-इन नवंबर में खत्म होने वाली है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को इन शेयरों में ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए। मनीकंट्रोल के एक अनुमान के मुताबिक इन न्यू एज कंपनियों (New age Companies) के लॉक-इन (Lock-in) खत्म होने वाले शेयरों का मूल्य 87,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन कंपनियों के पब्लिक इश्यू (Public Issue) की कुल साइज 34,600 करोड़ रुपये था।
पीई और वीसी नवंबर में इन कंपनियों में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकते हैं। लेकिन, वे अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बनाए रख सकते हैं कि ताकि रिटेल इनवेस्टर्स के बीच डर का माहौल नहीं बने। पहले ही उपर्युक्त चारों कंपनियों के शेयर बीते एक महीने में औसतन 19 फीसदी गिर चुके हैं। इस दौरान Sensex और Nifty में 4 फीसदी से ज्यादा तेजी आई है।
हेलियस कैपिटल के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि पीई फंड्स अपनी पूरी हिस्सेदारी एक बार में बेचेंगे। मार्केट के मौजूदा माहौल और इस तथ्य को देखते हुए कि न्यू-एज कंपनियों के शेयरों की कीमतें ज्यादा हैं, खरीदार मिलना मुश्किल है। अगर वे कुल 88,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों में से 5,000-10,000 करोड़ रुपये के शेयर भी बेचने में सफल हो जाते हैं तो उनकी किस्मत अच्छी होगी।" उन्होंने कहा, "दूसरे इनवेस्टर्स की नजरें भी इन कंपनियों में पीई और वीसी फंडों की अपनी हिस्सेदारी बेचने पर होंगी। निवेशकों को इन फंडों को कंपनियों के प्रमोटर के तौर पर देखना चाहिए।"
जोमैटो के शेयरों में जब जुलाई के अंतिम हफ्ते में लॉक-इन खत्म हुई थी तब इसके शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। तब Moore, Uber और Tiger Global जैसे प्री-आईपीओ निवेशकों ने अपने ज्यादातर शेयर बेच दिए थे। इसके चलते तब एक हफ्ते में ही कंपनी के शेयर 41 फीसदी टूट गए थे।
एक एनालिस्ट ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "न्यू-एज कंपनियों के शेयर खराब दौर से गुजर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि पीई और वीसी इनवेस्टर्स अभी बाजार का मूड खराब करना चाहेंगे, क्योंकि कई टेक्नोलॉजी कंपनियां आईपीओ पेश करने जा रही हैं।" उन्होंने कहा कि अगर लॉक-इन खत्म होने पर करीब 10 अरब डॉलर के शेयर बेचे जाते हैं तो इसे अमेरिका और चीन में उनकी बिकवाली के मुकाबले ज्यादा नहीं कहा जाएगा।