एजुकेशन सेक्टर के ज्यादातर बड़े स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन में गिरावट आने के संकेत हैं। इसकी वजह यह है कि इनकी ग्रोथ सुस्त पड़ने की आशंका है। पिछले साल की पहली छमाही तक इन स्टार्टअप्स ने काफी हाई वैल्यूएशन पर फंड जुटाए थे। इनमें कई Soonicorns हैं। जिन स्टार्टअप्स के जल्द Unicorn बनने की उम्मीद होती है, उन्हें Soonicorn कहा जाता है। पिछले साल की पहली छमाही में काफी पैसे जुटाने वाले स्टार्टअप्स में Doubtnut, Leap Scholar, Classplus और Teachmint जैसे स्टार्टअप्स शामिल थे। इन स्टार्टअप्स ने अपने रेवेन्यू की कई गुना वैल्यूएशन पर फंड जुटाए थे।
ज्यादा वैल्यूएशन बनी जी का जंजाल
Tracxn Technoligies के जरिए मनीकंट्रोल ने जो डेटा जुटाया है उसके मुताबिक इन स्टार्टअप्स ने अपने रेवेन्यू के करीब 100 से 5,000 गुना पर फंड जुटाए थे। Teachmint का रेवेन्यू मल्टीपल सबसे ज्यादा करीब 5000 गुना था। इस कंपनी की वैल्यूएशन मार्च 2022 में 50 करोड़ डॉलर लगाई गई थी। इसका रेवेन्यू सिर्प 96,595 डॉलर था। Doubtnunt ने कनवर्टिबल नोट्स के जरिए 25 लाख डॉलर जुटाए थे। FY22 में इसका रेवेन्यू सिर्फ 10.8 करोड़ रुपये था। इससे पहले Doubtnut ने जनवरी 2021 में 382 रुपये के रेवेन्यू मल्टीपल पर 3.2 करोड़ डॉलर जुटाए थे।
बीते दो साल में फंडिंग में बड़ी गिरावट
इनवेस्टर्स कंपनी की वैल्यू जानने के लिए रेवेन्यू मल्टीपल का इस्तेमाल करते हैं। स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन जानने के लिए आम तौर पर 12 महीने के ट्रेलिंग मल्टीपल की जगह फॉरवर्ड रेवेन्यू मल्टीपल का इस्तेमाल होता है। हालांकि, प्रोजेक्शन अंतिम 12 महीनों के डेटा पर आधारित होता है। पिछले दो साल में ऐडटेक सेक्टर में फंडिंग में बड़ी गिरावट आई है। इसमें आर्थिकि स्थितियों में आए बदलाव का बड़ा हाथ है। टेक्नोलॉजी आधारित एजुकेशनल सॉल्यूशंस की मांग बहुत घट गई है।
इंडिया में ऐडटेक कंपनियों ने 2021 में 5.32 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई थी, जो 2022 में 46 फीसदी गिरकर सिर्प 2.86 अरब डॉलर रह गई। कोरोना महामारी के दो सालों 2020 और 2021 में ऑनलाइन लर्निंग की मांग बहुत बढ़ गई थी। इस वजह से इन कंपनियों ने ज्यादा वैल्यूएशन पर हजारों करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसके बाद इंडिया में एडटेक सेक्टर में चार बड़ी कंपनियां सामने आईं। छोटी-छोटी कंपनियों ने भी उनके पीछे चलते हुए काफी फंड जुटाए थे।
कोरोना का असर घटने से शुरू हुई दिक्कत
कोरोना की महामारी का असर कम होने के बाद जब फिजिकल ट्यूशन सेंटर खुलने लगे तो ऑनलाइन लर्निंग सेवाएं की मांग घटने लगी। इससे स्टार्टअप्स ग्रोथ का अपने अनुमान में बदलाव करने लगे। उन्होंने अपने बिजनेस मॉडल में भी बदलाव किया है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ऐडटेक कंपनियों की वैल्यूएशन में गिरावट आई है।