प्रमोटर्स को अपनी हिस्सेदारी घटाने और ESOPs पर फोकस करना चाहिए, SoftBank के राजीव मिश्रा ने स्टार्टअप्स को दी सलाह

पिछले दो सालों में Paytm, Zomato, Delhivery Policybazaar सहित कई यूनिकॉर्न की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग हुई। इन कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपये का लॉस हो रहा है। इसलिए कई लोगों ने फाउंडर्स को ज्यादा इसॉप्स देने पर सवाल खड़े किए हैं। संयोग से इन सभी कंपनियों में सॉफ्टबैंक का निवेश है

अपडेटेड Jul 05, 2023 पर 8:16 PM
मिश्रा ने स्टार्टअप्स को सलाह देते हुए कहा कि प्रमोटर्स को 1 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के लिए कोशिश करने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपनी हिस्सेदारी घटाने और ESOPS देने पर फोकस करना होगा।

स्टार्टअप्स को पिछले एक-डेढ़ साल से बिजनेस के लिए पैसे जुटाना काफी मुश्किल हो गया है। फंडिंग की समस्या के साथ ही स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन में भी गिरावट देखने को मिली है। SoftBank Investment Advisors के चीफ राजीव मिश्रा का कहना है कि ऐसे माहौल में स्टार्टअप्स के प्रमोटर्स को निवेशकों को कंपनी की हिस्सेदारी देकर पैसे जुटाने की कोशिश करनी चाहिए। मिश्रा को इनवेस्टमेंट का व्यापक अनुभव है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप्स को सही फाउंडेशन पर फोकस करने और धीरे-धीरे बिजनेस को बढ़ाने की जरूरत है। कंपनी की वैल्यू ज्यादा नहीं लगानी चाहिए।

सिर्फ तेज ग्रोथ पर फोकस करने का फायदा नहीं

मिश्रा ने स्टार्टअप्स को सलाह देते हुए कहा कि प्रमोटर्स को 1 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के लिए कोशिश करने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपनी हिस्सेदारी घटाने और ESOPS देने पर फोकस करना होगा। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनसे यह पूछा जाता है कि क्या बहुत तेज ग्रोथ के लिए फाउंडर्स को गलत इनसेंटिव दिया जा रहा है। दरअसल, तेज ग्रोथ के चक्कर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढीला पड़ जाता है।


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कॉर्पोरेट गवर्नेंस की अनदेखी ठीक नहीं

उन्होंने कहा, "कई चीजें फाउंडर्स पर निर्भर करती हैं। अगर उसका व्यू शॉर्ट टर्म का है तो इंसेंटिव एक प्रॉब्लम है। सबके पास ईसॉप्स है। अगर वे 10 साल का नजरिया लेकर चलते हैं तब तो ठीक है, क्योंकि नजरिया का लंबा होना जरूरी है।" उन्होंने कहा कि अगर व्यापक परिदृश्य में देखा जाए तो इंडियन स्टार्टअप्स में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मसला बड़ा नहीं है। यह मसला पश्चिमी देशों और ब्रिक-एंड-मोर्टार बिजनेसेज में बड़ी प्रॉब्लम है।

यूनिकॉर्न को हो रहा करोड़ों का लॉस

पिछले दो सालों में Paytm, Zomato, Delhivery Policybazaar सहित कई यूनिकॉर्न की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग हुई। इन कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपये का लॉस हो रहा है। इसलिए कई लोगों ने फाउंडर्स को ज्यादा इसॉप्स देने पर सवाल खड़े किए हैं। संयोग से इन सभी कंपनियों में सॉफ्टबैंक का निवेश है। मिश्रा ने इसॉप्स को सही बताया है। उन्होंने कहा है कि इन कंपनियों की लिस्टिंग से पहले सभी जानकारियां पब्लिक की गई थीं।

इसॉप्स फ्री होना चाहिए

उन्होंने कहा कि मैनेटमेंट को इनसेंटिव देने में किसी तरह की दिक्कत नहीं है। आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि दो साल पहले एंप्लॉयीज को कंपनी में बनाए रखना एक चुनौती थी। इसॉप वेस्टिंग का कोई फायदा नहीं है अगर यह फ्री में नहीं दिया जाता। अगर इसे स्ट्राइक प्राइस पर इश्यू किया जाता है और स्टॉक की वैल्यू गिरकर आधी रह जाती है तो फिर इसका कोई फायदा नहीं है।

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