भारतीय स्टार्टअप्स ने की 10,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी, फंडिंग कम होने पर खर्च घटाने के तरीके खोज रहीं कंपनियां

मनीकंट्रोल रिसर्च और दूसरी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में अभी तक भारतीय स्टार्टअप्स में काम कर रहे 10,500 से अधिक कर्मचारियों का निकाला जा चुका है

अपडेटेड Jun 20, 2022 पर 5:30 PM
स्टार्टअप्स ने अधिकतर छंटनी सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में की है

विभिन्न भारतीय स्टार्टअप्स में अभी तक 10,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। दरअसल ग्लोबल शेयर बाजारों में अस्थिरता के बीच भारतीय स्टार्टअप फंड जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में वह खर्च कम करने के लिए छंटनी सहित तमाम दूसरे तरीकों को अपना रही हैं। मनीकंट्रोल रिसर्च और दूसरी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में अभी तक भारतीय स्टार्टअप्स में काम कर रहे 10,500 से अधिक कर्मचारियों का निकाला जा चुका है।

इससे पहले साल 2021 में भारतीय स्टार्टअप ने आक्रामक रूप से हायरिंग की थी और निवेशक भी इनमें खूब दिलचस्पी दिखा रहे थे। कई कंपनियों ने कई राउंड की फंडिंग राउंड किए थे। स्टार्टअप्स के बीच अच्छे टेक टैलेंट को हायर करने की होड़ मची थी, जिसकी वजह से इन कर्मचारियों की सैलरी भी काफी बढ़ गई थी। हालांकि एक साल बाद ही अब हालात बदल गए हैं।

इंडस्ट्री के कई सूत्रों के मुताबिक, स्टार्टअप्स ने अधिकतर छंटनी सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में की है। वहीं इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट से जुड़े पदों पर अभी तक इस छंटनी की आंच नहीं आई है।


एक दिन पहले ही गुरुग्राम मुख्यालय वाली सोशल कॉमर्स स्टार्टअप सिटीमॉल (CityMall) ने अपने 191 कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया था। कंपनी ने रविवार 19 जून को एक पोस्ट में बताया कि उसने अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव और मौजूदा फंडिंग माहौल को देखते हुए इन कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है।

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करीब तीन साल पहले शुरू हुई इस स्टार्टअप ने मार्च में 7.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी और इसमें एक्सेल, नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स, एलिवेशन कैपिटल और जनरल कैटलिस्ट जैसे निवेशकों ने निवेश किया हुआ है।

सिटीमॉल इकलौता स्टार्टअप नहीं है, जिसने इस साल अपने कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इस साल की शुरुआत से अब तक 25 से ज्यादा स्टार्टअप फंडिंग की दिक्कत और बिजनेस मॉडल में बदलाव आदि का हवाला देते हुए छंटनी कर चुके हैं। कई ने तो छंटनी का कारण कर्मचारियों का खराब प्रदर्शन भी बताया है।

मीशो (Meesho), कार्स24 (Cars24), ओला और ब्लिंकइट जैसे स्टार्टअप ने बड़ी संख्या में अपने कर्मचारियों को निकाला है। हालांकि छटंनी का सबसे अधिक असर भारतीय एडटेक स्टार्टअप्स पर पड़ा है। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थाओं के बंद रहने के कारण ऑनलाइन एजुकेशन/कोचिंग की काफी मांग बढ़ी थी।

हालांकि लॉकडाउन हटने के बाद स्कूलों/कोचिंग के खुलने और हाल के महीनों में फंडिंग कम होने से एडटेक सेक्टर पर दबाव पड़ा है, जिसके चलते अनएकेडमी, वेदांतु, लिडो और लर्निंग आदि को करीब 4,000 कर्मचारियों को निकालना पड़ा है। यह अभी तक स्टार्टअप ईकोसिस्टम में हुई कुल छंटनी का करीब 38 फीसदी है।

साल 2022 में अभी तक किन-किन स्टार्टअप्स ने अपने कितने कर्मचारियों की छंटनी की है, इसे आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं-

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