स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग का सूखा, 2023 के पहले छह महीनों में 79% कम पैसे जुटाए

इस साल जनवरी से जून के दौरान स्टार्टअप्स ने प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल के जरिए 3.8 अरब डॉलर जुटाए। एक साल पहले की समान अवधि में उन्होंने 18.4 अरब डॉलर जुटाए थे। ये आंकड़े वेंचर इंटेलिजेंस के हैं। इस साल के पहले छह महीनों में स्टार्टअप्स ने फंडिंग की 293 डील की। इसके मुकाबले पिछले साल के पहले छह महीनों में डील की संख्या 727 थी

अपडेटेड Jun 30, 2023 पर 6:11 PM
सिर्फ जून में इनवेस्टर्स ने 44 फंडिंग राउंड में हिस्सा लिए और 54.6 करोड़ डॉलर इनवेस्ट किए। पिछले साल की समान अवधि में इनवेस्टर्स ने 108 फंडिंग राउंड में 2.4 अरब डॉलर निवेश किए थे।

इंडिया में स्टार्टअप्स (Startups) के लिए समय अच्छा नहीं चल रहा है। 2023 के पहले छह महीनों में फंडिंग करीब 79 फीसदी घट गई है। कुछ साल पहले आसान फंडिंग और प्रोडक्ट्स की अच्छी डिमांड के चलते इंडियन स्टार्टअप्स ग्रोथ के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहे थे। अब हालात बदल गए हैं। इस साल जनवरी से जून के दौरान स्टार्टअप्स ने प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल के जरिए 3.8 अरब डॉलर जुटाए। एक साल पहले की समान अवधि में उन्होंने 18.4 अरब डॉलर जुटाए थे। ये आंकड़े वेंचर इंटेलिजेंस के हैं। इस साल के पहले छह महीनों में स्टार्टअप्स ने फंडिंग की 293 डील की। इसके मुकाबले पिछले साल के पहले छह महीनों में डील की संख्या 727 थी।

डील की संख्या में भी गिरावट

सिर्फ जून में इनवेस्टर्स ने 44 फंडिंग राउंड में हिस्सा लिए और 54.6 करोड़ डॉलर इनवेस्ट किए। पिछले साल की समान अवधि में इनवेस्टर्स ने 108 फंडिंग राउंड में 2.4 अरब डॉलर निवेश किए थे। जून 2023 में साल दर साल आधार पर फंडिंग अमाउंट में करीब 76 फीसदी कमी आई है, जबकि डील की संख्या में भी गिरावट आई है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 60 फीसदी घट गई है। महीना दर महीना आधार पर भी फंडिंग अमाउंट में करीब 42 फीसदी कमी आई है। यह इस साल मई में 53 डील के जरिए 94.8 करोड़ डॉलर था।


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रिस्क लेने की क्षमता घटी

ASK private Wealth के सीईओ और एमडी राजेश सलूजा ने कहा, "इंटरेस्ट रेट बढ़ने की स्थिति में पीई/वीसी फंड्स में ग्लोबल इंटरेस्ट घट सकता है। इसकी वजह यह है कि अगर मुझे 7.5 फीसदी पर प्रिफरेंस शेयर या बॉन्ड मिलता है तो इमर्जिंग मार्केट में मैं क्यों पीई या वीसी फंड का रिस्क लूंगा जब मुझे पता नहीं कि 10 साल में क्या होने जा रहा है। इसलिए यह सिर्फ रिस्क लेने की क्षमता में आया बदलाव है, जो राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति में देखने को मिलता है।"

इंडियन स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे पायदान पर

सलूजा का कहना है कि ऐसी स्थिति में इनवेस्टर्स रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। लेकिन, लंबे समय तक ऐसा रहने वाला नहीं है, क्योंकि चीजें व्यवस्थित होने जाने के बाद फिर पैसा ग्रोथ के पीछे भागेगा। इस बीच इंडियन टेक्नोलॉजी कंपनियों की वैल्यूएशन में भी कमी आई है। इंडियन स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे नंबर पर है। इसमें पिछले 9 महीनों में कोई बड़ा नया नाम नहीं जुड़ा है। किसी स्टार्टअप के एक अरब डॉलर वैल्यूएशन का कीर्तिमान जल्द हासिल करने की संभावना भी नहीं दिख रही है।

संभावित यूनिकॉर्न की लिस्ट भी घटी

सलूजा ने कहा कि स्टार्टअप्स भी मार्केट की मौजूदा स्थिति में इक्विटी से दूर रहना चाहते हैं। वे एचएनआई, अल्ट्राएचएनआई या वेंचर फंडों से पैसै जुटाना चाहते हैं, जहां कैश को लेकर स्थिति थोड़ी साफ दिखती है और इक्विटी डायल्यूट करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। मनीकंट्रोल ने हाल में बताया था कि हारून ने यूनिकॉर्न बनने की संभावना वाले जिन 122 स्टार्टअप की लिस्ट पिछले साल बनाई थी, वह इस साल घटकर 19 की रह गई है।

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