छंटनी, बंदी, फंडिंग का संकट, क्या थम गई हैं भारतीय स्टार्टअप्स की सफलता की कहानियां

भारत में स्टार्टअप इस साल अभी तक 5,000 से ज्यादा छंटनी कर चुके हैं। एक्सपर्ट इस साल और छंटनी की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि स्टार्टअप्स कॉस्ट घटाने की योजना पर काम कर रहे हैं

अपडेटेड May 24, 2022 पर 11:37 AM
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सीबी इनसाइट्स से मिले डाटा के मुताबिक, 2022 की दूसरी तिमाही में भारत के स्टार्टअप्स की वेंचर फंडिंग घटकर 3.6 अरब डॉलर रह गई है, जबकि जनवरी मार्च में 8 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी और एक साल पहले समान तिमाही में 10 अरब डॉलर से ज्यादा की फंडिंग मिली थी

जितेन शर्मा (बदला हुआ नाम) को बीते साल जब तेजी से उभरते एक स्टार्टअप मे चार गुनी सैलरी पर प्रोडक्ट इंजीनियर के रूप में जुड़ने का ऑफर मिला तो वह खासा खुश था। हालांकि, ज्वाइनिंग के महज आठ महीने के बाद स्टार्टअप ने फंड की कमी का हवाला देते हुए उसके साथ ही सैकड़ों लोगों की छंटनी कर दी। इससे पहले कंपनी ने 10 करोड़ डॉलर की वैल्यूएशन पर पैसा भी जुटाया था।

सैकड़ों की छंटनी

शर्मा उन हजारों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें 2022 की शुरुआत से अभी तक

अच्छी फंडिंग हासिल कर चुके स्टार्टअप निकाल चुके हैं। मनीकंट्रोल द्वारा जुटाए गए डाटा के मुताबिक, स्टार्टअप इस साल अभी तक 5,000 से ज्यादा छंटनी कर चुके हैं।


इस साल हो सकती हैं और छंटनी

वेंचर कैपिटल फर्म India Quotient के आनंद लूनिया इस साल और छंटनी की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि स्टार्टअप्स कॉस्ट घटाने की योजना पर काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि छंटनी का शिकार लोगों को जल्द ही नौकरी मिल जाएगी, क्योंकि भारत में हमेशा ही टैलेंट की कमी रहती है।

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लूनिया ने कहा, कर्मचारियों को यह अहसास होना चाहिए कि यदि स्टार्टअप्स तेजी से फंड जुटा रहे हैं तो वे आक्रामक रूप से फंड भी खर्च कर रहे हैं। इसलिए वेतन में भारी बढ़ोतरी का लुत्फ उठाने वालों को कॉस्ट में कटौती का शिकार भी होना पड़ सकता है।

फंडिंग का संकट

महंगाई में उछाल और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर स्टार्टअप फंडिंग (startup funding) पर पड़ा है, क्योंकि इनवेस्टर्स अब निवेश में कमी कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते तेल महंगा हुआ है और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ी है। चारों तरफ सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

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मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सीबी इनसाइट्स से मिले डाटा के मुताबिक, 2022 की दूसरी तिमाही में भारत के स्टार्टअप्स की वेंचर फंडिंग घटकर 3.6 अरब डॉलर रह गई है, जबकि जनवरी मार्च में 8 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी और एक साल पहले समान तिमाही में 10 अरब डॉलर से ज्यादा की फंडिंग मिली थी।

डाटा से यह भी पता चलता है कि 2020 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के बाद इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में पहली बार तिमाही आधार पर वेंचर फंडिंग में सुस्ती आई है।

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