Davos 2022: अमेरिका की महंगाई भारत के लिए है बड़ी चिंता, Zerodha के Nikhil Kamath ने क्यों कही यह बात

निखिल कामत ने कहा कि दुनिया भर में महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के इस दौर में स्टार्टअप फंडिंग मुश्किल हो गई हैं। जोखिम लेने की क्षमताएं कम हुई हैं

अपडेटेड May 24, 2022 पर 11:04 AM
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निखिल कामत, कोफाउंडर, जिरोधा

Davos 2022 : जिरोधा के कोफाउंडर निखिल कामत का मानना है कि नियामकीय संस्थानों के पास महंगाई को काबू में करने के लिए सीमित साधन हैं। कामत ने कहा कि महंगाई से राहत मिलने तक एक समय ब्याज दरें, महंगाई दर से ज्यादा हो जाएंगी।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना मीटिंग में भाग लेने पहुंचे निखिल कामत ने मनीकंट्रोल से बातचीत में महंगाई, स्टार्टअप्स और भारत की ग्रोथ स्टोरी पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महंगाई का यह दौर स्टार्टअप्स के लिए मुश्किल होने जा रहा है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई भारत के लिए एक बड़ी चिंता है। इससे महंगी पूंजी के लिए जोखिम लेने की क्षमता घट जाएगी।

शॉर्ट टर्म के लिए हैं समस्याएं


कामत ने कहा, इन दिनों ब्याज दरों में बढ़ोतरी और दूसरी समस्याओं के चलते फंडिंग मुश्किल हुई। अमेरिका और जापान में 1 फीसदी के आसपास कर्ज मिल रहा है, लेकिन भारत में कर्ज खासा महंगा है। रिस्क लेने को लेकर सोच और माहौल में बदलाव हुआ है। इसलिए फंडिंग हासिल करना मुश्किल हो गया है। हालांकि, कामत ने कहा कि समस्याएं शॉर्ट टर्म के लिए हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में संभावनाएं बेहतर होंगी।

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भारत की यूनिकॉर्न स्टोरी पर दुनिया में उत्साह

उन्होंने कहा कि दावोस में हर कोई भारत को लेकर उत्साहित है और भारत की यूनिकॉर्न स्टोरी पर दुनिया का भरोसा बना हुआ है।

हालात को देखते हुए योजनाओं में बदलाव के संदर्भ में निखिल कामत ने कहा कि हमारा बिजनेस साइक्लिकल है। हमारे बिजनेस में जब बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है तो हमारा प्रदर्शन बेहतर होता है। फिलहाल बाजार में मुश्किलें बनी हुई हैं। हालांकि, एक प्वाइंट पर बाजार में तेजी आएगी। हमारे बिजनेस में सुधार होगा और हम लोगों की भर्तियां करेंगे।

रिजर्व बैंक इसलिए बढ़ाता है ब्याज दर

महंगाई में बढ़ोतरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे काबू में करने के लिए बहुत ज्यादा टूल हैं। पारम्परिक जब भी महंगाई बढ़ती है, तो मनी की सप्लाई कम करने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है। मुझे हैरत नहीं होगी कि एक प्वाइंट पर अगर ब्याज दरें महंगाई दर से ज्यादा हो जाएं।

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