Navi छोड़कर स्टार्टअप शुरू करेंगे शोभित और अपूर्व, लेकिन इस नई स्ट्रैटेजी के साथ

छोटे निवेशकों का टारगेट करने वाली नावी (Navi) के टॉप एग्जीक्यूटिव्स शोभित अग्रवाल और अपूर्व आनंद अब नई स्ट्रैटेजी के साथ नई पारी शुरू करेंगे। दोनों ने नावी छोड़ दिया है और अब वे एक ऐसा स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हैं जिसका फोकस हाई वैल्यू वाले निवेश पर होगा। जानिए दोनों का सफर कैसा रहा और आगे की योजना क्या है?

अपडेटेड Mar 18, 2025 पर 11:04 AM
नावी छोड़ने के बाद शोभित और अपूर्व की योजना एसेट मैनेजमेंट कंपनी शुरू करने की है लेकिन अभी तक इन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन करने और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के पास कंपनी को रजिस्टर करने की नियामकीय प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जिसमें दो महीने लग सकते हैं। (File Photo- Pexels)

सचिन बंसल की फिनटेक नावी (Navi) से टॉप एग्जेक्यूटिव्स शोभित अग्रवाल और अपूर्व आनंद नई पारी की शुरुआत करने वाले हैं। मनीकंट्रोल को सूत्रों को हवाले से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक शोभित और अपूर्व अपनी एसेट मैनेजमेंट कंपनी शुरू करने के लिए ही नावी छोड़ दिया है। दोनों ही नावी में क्रेडिट डिस्बर्समेंट के वाइस प्रेसिडेंट थे। शोभित के पास बैंकिंग का काफी अनुभव है तो अपूर्व आनंद की को-फाउंडर के तौर पर टेक्निकल एक्सपीरिएंस है। जानकारी के मुताबिक शोभित ने इस महीने की शुरुआत में कंपनी छोड़ी थी तो अपूर्व ने पिछले साल अगस्त में इस्तीफा दिया था।

अब तक ऐसा रहा है सफर

शोभित नावी में छह साल से अधिक समय तक थे और पिछले तीन साल से इसके लेंडिंग और बॉरोइंग की कमान संभाल रहे थे। इसके पहले शोभित नावी के ट्रेजरी ऑपरेशंस की कमान संभाल रहे थे। नावी से पहले वह स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और ड्यूस बैंक में भी काम कर चुके हैं। वहीं अपूर्व की बात करें तो वह चीन साल के लिए नावी के सीटीओ (चीफ टेक्निकल ऑफिसर) थे। इसके अलावा वह हेल्थकेयर डेटा एनालिटिक्स फर्म SigTuple के को-फाउंडर हैं। इसके पहले ववह अमेरिकन एक्सप्रेस में डेटा एनालिस्ट भी रह चुके हैं।


अब आगे की ये है योजना

नावी छोड़ने के बाद शोभित और अपूर्व की योजना एसेट मैनेजमेंट कंपनी शुरू करने की है लेकिन अभी तक इन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन करने और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के पास कंपनी को रजिस्टर करने की नियामकीय प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जिसमें दो महीने लग सकते हैं। शोभित और अपूर्व की योजना सेबी के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) लाइसेंस के साथ अपना काम शुरू करने की है यानी कि इनके स्टार्टअप का फोकस हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर रहेगा। सेबी के नियमों के मुताबिक पीएमएस लाइसेंस के तहत न्यूनतम निवेश 50 लाख रुपये है। सूत्रों के मुताबिक फाउंडर्स कुछ निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं और दो महीने में सीड राउंड की उम्मीद है।

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