मनीष देवुलकर का मुंबई के गोरेगांव रेलवे स्टेशन के करीब एक सैंडविच स्टॉल है। कोविड लॉकडाउन खत्म होने के बाद PhonePe के एंजेट्स UPI Quick Response (QR) कोड लगाने के लिए उनके स्टॉल पर आए। एजेंट के कहने पर उन्होंने कोड लगवा लिया। तब से उनकी बिक्री 20 फीसदी बढ़ गई है।
देवुलकर ने कहा कि दो महीने बाद मैंने पाया कि मेरा बिजनेस 20 फीसदी बढ़ गया है। इसकी वजह यह है कि पेमेंट करना आसान हो गया है। यह चुटकी बजाते ही हो जाता है। खुले पैसे लेने और देने के झंझट से बचने के लिए ग्राहक पूछते हैं कि क्या वे यूपीआई से पेमेंट कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 40 फीसदी ग्राहक यूपीआई से पेमेंट कर रहे हैं। उनकी आमदनी करीब 5000 रुपये हर महीने बढ़ गई है।
यह भी पढ़ें : बड़ी खबर! बढ़ सकती है रिटायरमेंट की उम्र, साथ ही बढ़ेगी पेंशन, सरकार बना रही है योजना
देवुलकर की दुकान से थोड़ी ही दूर पर कमल गुढ़का की ग्रॉसरी स्टोर है। कमल 40 साल से इस दुकान को चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन यूपीआई ने जो बदलाव लाया है, उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
कमल और देवुलकर ऐसा कहने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। करोड़ों इंडियंस आज पैसे लेने और देने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें ग्राहक और दुकानदार दोनों शामिल हैं। कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद यूपीआई ने हर व्यक्ति की जिंदगी में खास जगह बना ली है। इस बदलाव में फिनटेक कंपनियों का बड़ा हाथ है।
नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के डेटा के मुताबिक, इस साल अगस्त में यूपीआई के जरिए 10.72 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन किए गए। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में UPI के जरिए 84 लाख करोड़ रुपये के 46 अरब ट्रांजेक्शन किए गए। इसके मुकाबले डेबिट कार्ड के जरिए 7.3 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन हुए, जबकि क्रेडिट कार्ड के जरिए 9.7 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन किए गए।
वॉल्यूम के लिहाज से पिछले फाइनेंशियल ईयर में कुल पेमेंट्स का करीब 47 फीसदी UPI के जरिए किए गए। 26 फीसदी क्रेडिट कार्ड के जरिए किए गए, जबकि 21 फीसदी डेबिट कार्ड के जरिए किए गए। मोबाइल वॉलेट्स के जरिए 6 फीसदी ट्रांजेक्शन किए गए।
UPI 2016 में शुरू हुआ था। तब कोई नहीं जानता था कि सिर्फ छह साल में यह हर व्यक्ति की जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाएगा। यूपीआई एक पेमेंट प्लेटफॉर्म है, जो व्यक्ति को अपना बैंक अकाउंट एक स्मार्टफोन ऐप से लिंक करने की इजाजत देता है। इससे तुरंत पैसे का ट्रांसफर हो जाता है। पैसा दुकानदार को या किसी दोस्त-रिश्तेदार को भेजा जा सकता है। आसान शब्दों में आप कह सकते हैं कि यह एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है।
यूपीआई के मंथली वॉल्यूम में थर्डपार्टी ऐप PhonePe की हिस्सेदारी जहां 48 फीसदी है, वही गूगल पे की 34 फीसदी है। इसके मुकाबले SBI, Yes Bank और ICICI Bank की मार्केट हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम है। एक सरकारी बैंक के टेक्नोलॉजी हेड ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "बैंक यूपीआई के लिए नया ऐप बनाने से हिचकते हैं। इसकी वजह यह है कि इस पर काफी अतिरिक्त खर्च आता है। इसका मेंटेनेंस और मार्केटिंग भी करनी पड़ती है। बैंक अपने मौजूदा मोबाइल बैंकिंग ऐप में ही फैसिलिटी बढ़ाना पसंद करते हैं।"
इस वजह से पेमेंट की दुनिया में फिनटेक की दखल बढ़ जाती है। बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, "फिनटेक ने टेक्नोलॉजी, डेटा और इनोवेशन अपने साथ लेकर आए हैं। बैंकों के पास मैच्योरिटी, कंप्लायंस और काम में निपुणता है। इसलिए दोनों के बीच सहयोग से शानदार फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बन सकते हैं।"