अनिल अग्रवाल की Vedanta Resources को पैसे की जरूरत है। कंपनी करीब 3 अरब डॉलर के कर्ज (Bonds) को चुकाने के लिए और वक्त चाहती है। इस कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए वह इनवेस्टर्स से बात कर रही है। कंपनी को ये कर्ज 2024 और 2025 में चुकाने हैं। वेदांता ग्रुप ने अपनी कंपनियों की बेहतर वैल्यू हासिल करने के लिए बिजनेसेज को डीमर्ज करने का ऐलान किया है। लेकिन, इससे वेदांता को कर्ज देने वाले इनवेस्टर्स संतुष्ट नहीं हैं। वेदांता ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड्स की कीमतें लगातार गिर रही हैं। आखिर वेदांता ने इस मुश्किल से निकलने के लिए क्या प्लान बनाया है? यह सवाल न सिर्फ कंपनी के इनवेस्टर्स को परेशान कर रहा है बल्कि इस ग्रुप की कंपनियों के शेयरों के निवेशक भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं।
