इंडियन स्टॉक मार्केट्स ने तेजी दिखाई है। वह भी ऐसे समय में जब ग्लोबल मार्केट्स (Global Markets) में निराशा का माहौल है। इससे MSCI Emerging Market Index में इंडिया का वजन (Weight) बढ़ा है, जबकि चीन के वजन में कमी आई है। इकोनॉमी की ग्रोथ को देखते हुए इंडियन स्टॉक मार्केट्स में तेजी सही जान पड़ती है। अगर दुनिया और इंडिया के बीच के घटते कनेक्शन (decoupling) को छोड़ दिया जाए तो इस साल इंडिया के जीडीपी की ग्रोथ के अनुमान में कमी की गई है। RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। प्राइवेट एजेंसियों ने ग्रोथ इससे भी कम रहने का अनुमान जताया है। क्या इसका मतलब यह है कि शेयर बाजार पर इकोनॉमिक ग्रोथ में आ रही कमी का असर नहीं पड़ा है? इस सवाल का जवाब पाने के लिए हम मार्केट कैपिटलाइजेशन और नॉमिनल जीडीपी रेशियो के पैमाने का इस्तेमाल कर सकते हैं। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे (Warren Buffett) इसे मार्केट वैल्यूएशन का पता लगाने के लिए अच्छा पैमाना मानते हैं।
