करीब 13 साल पहले भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को इलेक्ट्रिकल वेईकल्स में कोई भविष्य नहीं दिख रहा था। हर वेंडर से सस्ते से सस्ता पार्ट लेकर असेंबलिंग के बाद एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की लागत करीब ₹5 लाख पड़ती। ऑटो इंडस्ट्री के मुताबिक यह मॉडल व्यावहारिक नहीं था। इन सबके बीच तरुण मेहता और स्वप्निल जैन ने इसे अलग नजरिए से देखा और वह भी तब, जब वे अभी भी आईआईटी मद्रास से इंजीनयरिंग करके निकले थे। खास बात ये भी है कि वह टेस्ला (Tesla) की स्टडी तो कर रहे थे लेकिन कारों की नहीं बल्कि इसके फाइनेंशियल्स की। इस स्टडी की नींव पर उन्होंने एथर एनर्जी (Aether Energy) जैसी ऐसी कंपनी खड़ी कर दी जिसने पांच साल तक कोई सेल्स नहीं की और अब यह यह ₹50 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी है।
