₹200 करोड़ का दांव, Ather Energy में इस कारण सरकारी फंड कर रही निवेश

Ather Energy News: एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक एथर एनर्जी ₹1200 करोड़ जुटा रही है और भारत सरकार इसमें ₹200 करोड़ का निवेश कर रही है। अब सवाल ये उठता है कि सरकार एक लिस्टेड दोपहिया बनाने वाली कंपनी में सरकार क्यों पैसे लगा रही है। जानिए इसके पीछे की वजह और सरकार की स्ट्रैटेजी क्या है और क्या यह प्रत्यक्ष रूप से एथर एनर्जी में पैसे लगा रही है

अपडेटेड Jul 16, 2026 पर 12:14 PM
इंडिया-जापान फंड के निवेश के लिए एथर एनर्जी इसलिए फिट है क्योंकि विदेशों से तकनीक मंगाकर यहां असेंबलिंग करने वाली कई दूसरी कंपनियों की बजाय Ather Energy ने अपनी अधिकतर तकनीक को यहीं डेवलप किया है।

दिग्गज ईवी कंपनी एथर एनर्जी (Ather Energy) ने नई पूंजी जुटाने का ऐलान किया है। इसमें एक निवेशक इंडिया-जापान फंड (IJF) का भी नाम सामने आया। यह भारत सरकार और JBIC (जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन) का एक इंवेस्टमेंट वेईकल है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि एक लिस्टेड दोपहिया बनाने वाली कंपनी में सरकार क्यों पैसे लगा रही है। इसका जवाब कंपनी को बचाने की कोशिश या मार्केट के बड़े खिलाड़ी को चुनना नहीं है बल्कि सरकार की व्यापक इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी है। सरकार का लक्ष्य वैश्विक कंपनियों के टक्कर की ईवी बनाने वाली कंपनी तैयार करना, तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश को क्लीन मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करना है।

सरकार का सीधे निवेश नहीं

एथर एनर्जी में निवेश को लेकर एक और अहम बात ये है कि इसमें सरकार प्रत्यक्ष रूप से पैसे नहीं लगा रही है। यह निवेश इंडिया-जापान फंड के जरिए हो रहा है। $60 करोड़ का यह फंड साल 2023 में NIIF (नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रा फंड) और जेबीआईसी ने शुरू किया था। NIIF के जरिए भारत सरकार की इसमें 49% हिस्सेदारी है और बाकी 51% जेबीआईसी की। यह फंड क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और कम-कार्बन वाली टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने वाले बिजनेस में निवेश करने के लिए बनाया गया है। आईजेएफ आम सरकारी निवेश इकाई की बजाय एक लॉन-टर्म इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर के तौर पर काम करता है।


Ather Energy कैसे सरकार के क्राइटेरिया में फिट

आईजेएफ के निवेश के लिए एथर एनर्जी इसलिए फिट है क्योंकि विदेशों से तकनीक मंगाकर यहां असेंबलिंग करने वाली कई दूसरी कंपनियों की बजाय एथर एनर्जी ने अपनी अधिकतर तकनीक को यहीं डेवलप किया है। इसने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड वेईकल इकोसिस्टम, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स को खुद तैयार किया है। सरकार के लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमता वाली कंपनियों को सपोर्ट करना ईवी को बढ़ावा जितना ही अहम होता जा रहा है। ईवी, बैट्री और उनसे जुड़ी टेक्नोलॉजी की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से सरकार की 'मेक इन इंडिया' मुहिम को सपोर्ट मिलता है और अधिक वैल्यू वाली मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां भी तैयार होती हैं।

सिर्फ एक ही कंपनी में ही नहीं लग रहा पैसा

एथर एनर्जी में आईजेएफ के जरिए सरकार निवेश काफी अहम है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है क्योंकि इससे पता चलता है कि कंपनी ऐसे सेक्टर में काम कर रही है जिसे लंबे समय तक पॉलिसी सपोर्ट मिलता रहेगा। ऐसा नहीं है कि फंड सिर्फ एथर एनर्जी में ही पैसे लगा रही है बल्कि महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी EKA मोबिलिटी में भी इसका निवेश है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अलग-अलग सेगमेंट- जैसे तिपहिया और कमर्शियल गाड़ियों से लेकर प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर तक की कंपनियों को सपोर्ट करके यह फंड किसी एक कंपनी पर दांव लगाने की बजाय एक बड़ा ईवी इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रही है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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