Nirmala Sitharaman: '3F पर करें फोकस', वित्त मंत्री ने समझाया पीएम मोदी क्यों चाहते हैं विदेशी मुद्रा बचाए देश
Nirmala Sitharaman: प्रधानमंत्री विदेशी मुद्रा बचाने की बात बार-बार क्यों कर रहे हैं? आखिर '3F' फॉर्मूला क्या है और इसका आपकी जेब से क्या संबंध है? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट, महंगे तेल, उर्वरक और सोने के बीच इसकी पूरी वजह बताई।
वित्त मंत्री ने अप्रैल 2026 के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी बाजार दोनों में मांग मजबूत बनी हुई है।
Nirmala Sitharaman: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 मई को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष कारोबार, आम लोगों और MSME क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, जरूरी सामान की आपूर्ति में दिक्कत और कारोबार चलाने के लिए पैसे की बढ़ती जरूरत ने अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि लोगों को "3F" यानी Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Foreign Exchange (विदेशी मुद्रा) के महत्व को समझना चाहिए। सरकार नागरिकों और उद्योगों को सुरक्षित रखना चाहती है। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां तक मुमकिन हो विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है।
SIDBI के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार ऊंची बनी हुई कीमतें बड़ी वजह हैं।
कच्चा तेल ज्यादा बढ़ा रहा परेशानी
वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। किसी हफ्ते में एक भाव होता है, फिर अगले सप्ताह दूसरा और उसके बाद फिर नया भाव सामने आ जाता है।
उन्होंने कहा कि पिछले 80 से 90 दिनों से यही स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में सरकार को विदेशी मुद्रा और आयात से जुड़ी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
ईंधन, उर्वरक और सोना बढ़ा रहे दबाव
निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के सामने बाहरी मोर्चे पर तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, दूसरी उर्वरकों की बदलती कीमतें और तीसरी सोने के बढ़ते दाम।
उन्होंने बताया कि इन तीनों चीजों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है। इसलिए इनकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 15 मई 2026 तक 689 अरब डॉलर था। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने से पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
भारत की अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत
वित्त मंत्री का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि GST से मिलने वाला रेवेन्यू इसकी सबसे बड़ी मिसाल है।
उनके मुताबिक सितंबर 2025 में कर दरों में बदलाव किए जाने के बाद भी वित्त वर्ष 2025-26 में कुल GST कलेक्शन 22 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 8.3% ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के इस दौर में 8.3% की बढ़ोतरी को छोटी उपलब्धि नहीं माना जा सकता। इसके अलावा दूसरे आर्थिक संकेतक भी देश में मजबूत मांग का संकेत दे रहे हैं।
ट्रैक्टर और वाहन बिक्री में जोरदार बढ़त
वित्त मंत्री ने अप्रैल 2026 के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी बाजार दोनों में मांग मजबूत बनी हुई है। अप्रैल में घरेलू थोक ट्रैक्टर बिक्री 26% बढ़ी। पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 25% का इजाफा दर्ज किया गया। तीन पहिया वाहनों की बिक्री 32% बढ़ी, जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री में 28% का उछाल आया।
उन्होंने कहा कि जीवन बीमा कंपनियों के नए प्रीमियम कलेक्शन में भी 39% की बढ़ोतरी हुई है, जो लोगों की बचत और निवेश क्षमता को दिखाती है।
बैंकों की हालत पहले से बेहतर
सीतारमण ने कहा कि मजबूत बैंकिंग व्यवस्था भी देश की आर्थिक रफ्तार को सहारा दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का सकल एनपीए घटकर 1.93% रह गया। यानी बैंकों के फंसे हुए कर्ज में कमी आई है।
इसी दौरान खुदरा कर्ज 18.1%, कृषि क्षेत्र को दिया गया कर्ज 15.5% और MSME क्षेत्र को दिया गया कर्ज 18.2% बढ़ा। इससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में कर्ज की उपलब्धता बनी हुई है।
निजी कंपनियां बढ़ा रहीं निवेश
वित्त मंत्री ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सितंबर 2025 में निजी क्षेत्र का निवेश सालाना आधार पर 67% बढ़ा था।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों का आगे आकर निवेश करना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे रोजगार, उत्पादन और कारोबार की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
1 लाख करोड़ का सुरक्षा कोष
सीतारमण ने कहा कि सरकार ने संभावित वैश्विक संकटों को देखते हुए पहले ही तैयारी कर ली थी। उन्होंने बताया कि 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में ही सरकार ने Economic Stabilization Fund के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया था। यह फैसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी चिंताएं बढ़ने से पहले लिया गया था।
वित्त मंत्री के मुताबिक इस कोष का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर दुनिया में कोई बड़ा संकट आए, सप्लाई चेन प्रभावित हो जाए या किसी क्षेत्र पर अचानक दबाव बढ़ जाए, तो भारत तेजी से कदम उठा सके।
MSME को सहारा
सीतारमण ने कहा कि सरकार की नीतियां इस तरह बनाई जा रही हैं कि जहां नागरिकों और कारोबार पर दबाव हो, वहां असर को कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार MSME क्षेत्र, निर्यातकों और उन कारोबारों को सहारा देने पर ध्यान दे रही है, जिन्हें कामकाज चलाने के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ रही है। साथ ही आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने की भी कोशिश की जा रही है।