मुश्किल में फंसी Go First ने इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन के लिए खुद NCLT में अर्जी दी है। कंपनी बैंकों को कर्ज चुकाने में थोड़ी राहत चाहती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गो फर्स्ट का मामला संकट में फंसी कंपनियों के लिए एक मिसाल बन सकता है। गो फर्स्ट वाडिया ग्रुप की कंपनी है। पैसे की कमी की वजह से उसने अपनी सेवाएं फिलहाल बंद कर दी है। उसने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सेक्शन 10 के तहत दिल्ली में NCLT में वॉलेंटरी इनसॉल्वेंसी के लिए अप्लिकेशन फाइल किया है।
गो फर्स्ट ने क्यों बंद की सेवाएं?
गो फर्स्ट ने कहा है कि उसे अपनी हवाई सेवाएं बंद करने को मजबूर होना पड़ा। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी कंपनी Pratt & Whitney ने कंपनी को इंजन की सप्लाई नहीं की। गो फर्स्ट के करीब 50 फीसदी विमान इंजन में खराबी की वजह से उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। इस वजह से कंपनी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर सकी। इसका असर उसके रेवेन्यू पर पड़ा।
इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन का मतलब क्या है?
IBC के सेक्शन 10 में बैंकों के लोन पर डिफॉल्ट करने वाली कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करने के प्रावधानों का उल्लेख है। NCLT ने 10 मई को NCLT की याचिका मंजूरी कर ली थी। इसके बाद कंपनी को बैंकरप्सी प्रोटेक्शन मिल गया है। साथ ही उसे लीज पर विमान देने वाली कंपनियों के विमान वापस लेने पर रोक लग गई है।
NCLT ने Alvarez & Marsal के अभिलाष लाल को अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया है, जो गो फर्स्ट को चलाएंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दूसरी कंपनियां जो पैसे की कमी का सामना कर रही हैं, वे भी एनसीएलटी से थोड़े समय के लिए राहत की मांग कर सकती हैं। लॉ फर्म के एस लीगल एंड एसोसिएट की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चांदवानी ने कहा, "गो फर्स्ट के मामले से इंडिया में IBC को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।"
यह मामला क्यों बन सकता है मिसाल?
उन्होंने कहा कि गो फर्स्ट ने जिन स्थितियों में अप्लिकेशन दाखिल किया है, वह भविष्य के IBC के मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है। कई कंपनियां लोन देने वाले बैंकों से राहत के लिए एनसीएलटी में का रास्ता अपना सकती हैं। Novatis Expert Resolution के पार्टनर विनीत काबरा ने कहा कि गो फर्स्ट अब अपनी वित्तीय स्थिति और ऑपरेशन शुरू करने के लिए विकल्पों पर विचार कर सकती है। इसकी वजह यह है कि कंपनी को समय मिल गया है।