Wipro से जतिन दलाल का इस्तीफा ग्रोथ के लिए कंपनी के संघर्ष के बारे में बताता है

Wipro के जून तिमाही के नतीजे अच्छे नहीं रहे। लगातार तीसरी तिमाही एंप्लॉयीज की संख्या में गिरावट देखने को मिली। मीडिया और एनालिस्ट्स ने कंपनी के प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठाए। इनमें से कई के जवाब सीएफओ जतिन दलाल ने दिए थे। उन्होंने कहा था कि मुश्किलों के बावजूद कंपनी अपना सफर और फोकस मध्यम अवधि के लक्ष्यों को हासिल करने के मकसद से जारी रखेगी। तब शायद ही किसी ने सोचा था कि सिर्फ दो महीने बाद वह कंपनी से इस्तीफा दे देंगे

अपडेटेड Sep 22, 2023 पर 1:02 PM
दलाल ने विप्रो के सीईओ Thierry Delaporte को अपना इस्तीफा भेजा है। उन्होंने इसमें कहा है कि वह कंपनी के बाहर अपने प्रोशेनल्स गोल्स पूरे करना चाहते हैं। इस इस्तीफे को लेकर एनालिस्ट्स और कंपनी पर नजर रखने वालों के बीच चर्चा जारी है। कई एनालिस्ट्स का कहना है कि दलाल विप्रो के भरोसेमंद एग्जिक्यूटिव थे।
     
     
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    Wipro के लिए जून तिमाही मुश्किल रही। इंडिया की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। ग्रोथ गाइडेंस कमजोर रहा। लगातार तीसरी तिमाही एंप्लॉयीज की संख्या में गिरावट देखने को मिली। मीडिया और एनालिस्ट्स ने कंपनी के प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठाए। इनमें से कई के जवाब सीएफओ जतिन दलाल ने दिए थे। उन्होंने कहा था कि मुश्किलों के बावजूद कंपनी अपना सफर और फोकस मध्यम अवधि के लक्ष्यों को हासिल करने के मकसद से जारी रखेगी। तब शायद ही किसी ने सोचा था कि सिर्फ दो महीने बाद वह कंपनी से इस्तीफा दे देंगे। 21 सितंबर को दलाल ने विप्रो से इस्तीफा दे दिया। कंपनी अपर्णा अय्यर को उनकी जगह सीएफओ नियुक्त कर दिया है। उन्होंने 22 सितंबर से नई जिम्मेदारी संभाल ली है।

    दलाल के पास मुश्किल सवालों के जवाब देने की काबिलियत थी

    दलाल ने Wipro के सीईओ Thierry Delaporte को अपना इस्तीफा भेजा है। उन्होंने इसमें कहा है कि वह कंपनी के बाहर अपने प्रोशेनल्स गोल्स पूरे करना चाहते हैं। इस इस्तीफे को लेकर एनालिस्ट्स और कंपनी पर नजर रखने वालों के बीच चर्चा जारी है। कई एनालिस्ट्स का कहना है कि दलाल विप्रो के भरोसेमंद एग्जिक्यूटिव थे। वह अपनी काबिलियत से सीएफओ की पॉजिशन तक पहुंचे थे। उन्हें टैलेंटेड और ऐसा व्यक्ति माना जाता था तो मीडिया और एनालिस्ट्स के मुश्किल सवालों के जवाब दे सकता था। वह विप्रो के माहौल को अच्छी तरह से समझते थे। उन्हें विप्रो के प्रमोटर अजीम प्रेमजी का भरोसा भी हासिल था।


    विप्रो को टैलेंट कंपनी में बनाए रखने की सलाह

    विप्रो के बोर्ड के पूर्व सदस्य सुरेश सेनापति ने दलाल के इस्तीफे पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा है कि विप्रो को टैलेंट को कंपनी में बनाए रखने के उपाय करने चाहिए। उन्होंने इस बारे में मनीकंट्रोल को बताया। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि दलाल ने ऐसा करियर चुना है, जिसमें वह ज्यादा कंट्रिब्यूट कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह विप्रो के लिए बड़ा लॉस है। उन्होंने कहा कि जतिन का कंपनी से जाना दुखद है और निराशाजनक है।

    पहली बार विप्रो में टॉप एग्जिक्यूटिव के इस्तीफे को लेकर हो रही इतनी चर्चा

    सेनापति ने कहा कि मेरा मानना है कि विप्रो को टैलेंट को अपने साथ बनाए रखने के लिए कुछ करना चाहिए। कंपनी की ग्रोथ के लिए यह जरूरी है। पिछले कुछ समय से कंपनी की ग्रोथ इंडस्ट्री के मुकाबले सुस्त रही है। उन्होंने दलाल को भविष्य की शुभकामनाएं भी दी। उनकी यह टिप्पणी इसलिए बहुत अहम है, क्योंकि पहली बार किसी सीनियर लीडर टॉप एग्जिक्यूटिव्स के कंपनी के छोड़ने के बारे में कुछ कहा है। खासकर कंपनी के नए सीईओ के बाद ऐसा हुआ है। कंपनी की ग्रोथ में कमी आई है।

    सीनियर एग्जिक्यूटिव्स का कंपनी छोड़ना चिंता की बात

    ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि पिछले कई महीनों में सीनियर मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को कंपनी छोड़ना चिंता की बात है। कंपनी के प्रदर्शन में आ रही गिरावट को रोकने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हो सकते हैं लेकिन नए सीईओ Delaporte के आने के बाद के चार साल में कई एग्जिक्यूटिव्स को कंपनी छोड़ देने को अच्छा नहीं कहा जा सकता। विप्रो प्रदर्शन में सुधार की कोशिश कर रही है। एनालिस्ट्स का कहना है कि FY2024 में कंपनी की ग्रोथ प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कमजोर रहने का अनुमान है।

    काफी खराब रहा है विप्रो का हालिया प्रदर्शन

    FY222 की चौथी तिमाही से विप्रो की साल दर साल की ग्रोथ में तेज गिरावट आई है। 30 सितंबर को खत्म तिमाही में कंपनी ने गाइडेंस ने भी उम्मीद नहीं जगाई है। कंपनी को कंस्टैंट करेंसी ग्रोथ दूसरी तिमाही में -2 से 1 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। मार्जिन को लेकर भी चिंता रही है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से तुलना करने पर विप्रो का मार्जिन सबसे कमजोर दिखता है। यह सिर्फ Cognizant से थोड़ा ज्यादा है। पिछली तीन तिमाहियों से कंपनी इसे 16 फीसदी ऊपर बनाए रखने में सफल रही है। लेकिन, उसका लक्ष्य 17 फीसदी है।

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