Bhavantar Yojana 2025: सोयाबीन किसानों के लिए सरकार का बड़ा फैसला, इस पहल से क्या होगा फायदा

Bhavantar Yojana 2025: डी.एन. पाठक ने कहा कि मध्यप्रदेश में 8 साल बाद भावांतर योजाना शुरु हुई। 4600 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे भावांतर योजना का फायदा नहीं। 15 दिनों के औसत भाव पर सरकार भरपाई करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में रजिस्ट्रेशन शुरु हो गई है। मध्यप्रदेश सरकार की पहल से किसानों को फायदा होगा।

अपडेटेड Sep 29, 2025 पर 5:04 PM
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MP सरकार ने सोयाबीन किसानों को राहत देने के मकसद से भावांतर योजना की शुरुआत करने का ऐलान किया है।

Bhavantar Yojana 2025: MP सरकार ने सोयाबीन किसानों को राहत देने के मकसद से भावांतर योजना की शुरुआत करने का ऐलान किया है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना की शुरूआत की है। इस योजना के तहत सोयाबीन किसानों को होने वाले घाटे की भरपाई करेगी।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि एमएसपी के आधार पर ही सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना के माध्यम से उनके खातों में बोनस दिया जाएगा। अगर उनकी सोयाबीन 5 हजार रुपए में बिकती है तो 300 रुपए से ज्यादा बोनस दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसान पहले की तरह फसल को मंडियों में बेचेंगे। अगर एमएसपी से कम कीमत पर सोयाबीन की फसल बिकती है, तो किसानों को होने वाले घाटे की भरपाई भावांतर योजना के माध्यम से ही सरकार करेगी। फसल बेचने के दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सरकार किसानों के खाते में ट्रांसफर करेगी।इसके लिए रजिस्ट्रेशन 10 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक जारी रहेगा।


अगर एमपी में सोयाबीन का फसल, बारिश या किसी रोग के कारण खराब हुई है, तो उन किसानों को मुआवजा भी दिया जाएगा। इसके लिए सभी क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल क्षति का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वे के तुरंत बाद किसानों को सोयाबीन की खराब फसल के नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।

SOPA के डी.एन. पाठक ने कहा कि मध्यप्रदेश में 8 साल बाद भावांतर योजाना शुरु हुई। 4600 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे भावांतर योजना का फायदा नहीं। 15 दिनों के औसत भाव पर सरकार भरपाई करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में रजिस्ट्रेशन शुरु हो गई है। मध्यप्रदेश सरकार की पहल से किसानों को फायदा होगा।

NAFED ने 20 लाख सोयाबीन खरीदा था, बिक्री कम की होगी । महाराष्ट्र सरकार को भी भावांतर योजना को लागू करना चाहिए। अभी की कटाई में सोयाबीन में काफी नमी होगी। ज्यादा नमी वाली फसल को कोई खरीदना नहीं चाहता। मध्यप्रदेश सरकार ने 2.5 महीने का वक्त दिया है।

किसान पहले खराब क्वालिटी वाली फसल बेचने को लाते है। इस साल सोयाबीन की सप्लाई कम दिख रही है। शुरुआती सोयाबीन की क्वालिटी काफी खराब होती है।सोयाबीन की सप्लाई कैसी रहेगी इस पर आशंका कायम है। देश को 70-75 लाख टन सोयाबीन मील चाहिए। सोयाबीन की फसल ही इसकी आगे की चाल तय करेगी। अर्जेटीना के ड्यूटी हटाने से तेल का इंपोर्ट बढ़ा है।

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