कोच्चि और कर्नाटक में कालीमिर्च की नई फसल की तुड़ाई करीब-करीब पूरी हो चुकी है। इस साल मई और जून के बाच केरल में अच्छी बारिश हुई। इससे उम्मीद है कि अगली फसल भी बेहतर होगी। लेकिन इस दौरान कर्नाटक में बारिश कम हुई है। लिहाजा वहां भी तुड़ाई की प्रक्रिया लगातार जारी है। लेकिन देश के जिन राज्यों में कालीमिर्च की मांग ज्यादा है वहां भारी बारिश और बाढ़ की वजह से माल की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। लिहाजा कालीमिर्च की कीमतें वहां बढ़ सकती हैं।
फिलहाल जिन राज्यों में कालीमिर्च की डिमांड ज्यादा है वहां स्टॉक बना हुआ है। लेकिन जुलाई-अगस्त में अगर बारिश तेज रहने और उत्पादक क्षेत्रों से सप्लाई कम होने के कारण स्टॉक में लगातार कमी आ सकती है। इस बीच, श्रीलंका से नई कालीमिर्च की आवाक शुरू हो गई है। इससे भारत में आयात बढ़ने की संभावना है। भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते के तहत 2,500 टन तक कालीमिर्च बिना शुल्क के आयात की जा सकती है। इसके बाद भी आयात पर केवल 8% सीमा शुल्क लगेगा।
श्रीलंका के रास्ते वियतनाम की कालीमिर्च भी भारत पहुंचती है। पहले नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश के जरिए वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड और ब्राजील की कालीमिर्च की तस्करी होती थी, लेकिन अब सीमाओं पर सख्ती के चलते यह रास्ता लगभग बंद हो गया है।
अब कालीमिर्च की आपूर्ति का ऑफ-सीजन शुरू होने वाला है और आने वाले त्योहारों में घरेलू मांग बढ़ने की संभावना है। 2024-25 के सीजन में कालीमिर्च का उत्पादन कम रहा, जबकि निर्यात में इजाफा हुआ है। अगर मसाला तेल और ओलियोरेसिन बनाने वाली कंपनियों ने खरीदारी में रुचि दिखाई और विदेशों से आयात सीमित रहा, तो कीमतों में मजबूती आ सकती है।
वित्त वर्ष 2023-24 में कालीमिर्च का निर्यात 17,890 टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 20,830 टन हो गया है। इसी अवधि में निर्यात से होने वाली आय भी 736.48 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,055 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
इस तरह, आने वाले महीनों में कालीमिर्च की कीमतें आयात और घरेलू मांग के संतुलन पर निर्भर रहेंगी।