सरकार ने गेहूं के जमाखोरों के खिलाफ एक्शन लेने का फैसला किया है जिसके तहत सरकार गेहूं की स्टॉक लिमिट तय करने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार ट्रेडर्स से रोजाना स्टॉक बताने को भी कह सकती है। सरकार ने कहा है कि देश में जमाखोरों की वजह से गेहूं की कीमतों में उछाल आया है। जिसे रोकने के लिए गेहूं की स्टॉक लिमिट तय करना जरुरी हो जाता है।
बता दें कि जुलाई से गेहूं की रिटेल और थोक कीमतें बढ़ी है। खाद्य सचिव ने कहा है कि देश में गेहूं की कोई समस्या नहीं है और केंद्र के पास सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में 2.4 करोड़ टन गेहूं उपलब्ध है। बाजार में पर्याप्त गेहूं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा कि सट्टा कारोबार की वजह से कीमतों पर असर पड़ा है। गेहूं बाजार में धीरे-धीरे आ रहा है क्योंकि सटोरियों ने कीमतों में वृद्धि की संभावना में जमाखोरी की है। हमारे गेहूं के स्टॉक की स्थिति बेहतर है। केंद्रीय पूल में हमारे पास 2.4 करोड़ टन गेहूं है। सरकार आगामी रबी सत्र में गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास कर रही है। अक्टूबर के अंतिम दिनों में रबी की बुआई शुरू होगी।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के रबी सत्र में सरकार का गेहूं उत्पादन अनुमान लगभग 10.5 करोड़ टन का है जबकि व्यापार जगत का अनुमान 9.5-9.8 करोड़ टन का है। जबकि देश में गेहूं की खपत 8.4-8.5 करोड़ टन होती है। मौजूदा वित्त वर्ष में 45 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट हुआ है। वहीं वित्त वर्ष 2021-22 में 90 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट किया गया है।
वर्तमान समय में गेहूं का मंडियों में भाव MSP से ज्यादा है। मंडियों में गेहूं का भाव 2200-2300 प्रति क्विंटल है जबकि MSP 2015 रुपये प्रति क्विंटल है।