नॉर्थ-वेस्ट के इलाकों में अभी से चढ़ता पारा किसानों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। वहीं देश में अप्रैल से दिसंबर के बीच फर्टिलाइजर का इंपोर्ट 18% से ज्यादा गिरा है। क्या हैं इसके कारण? चढ़ते पारे का रबी फसलों खासकर गेहूं की फसल पर क्या असर होगा? वहीं देश फर्टिलाइजर उत्पादन में कब तक आत्मनिर्भर होगा।
नॉर्थ-वेस्ट के इलाकों में तापमान बढ़ने लगा है। पारा चढ़ने से फसलों की नुकसान होने की आशंका है। नॉर्थ-वेस्ट गेहूं की बुआई का प्रमुख इलाका है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की है। अधिकारियों से हालात की जानकारी मांगी है। जरूरत पर हर संभव मदद देने का आदेश दिया है।
IIWBR ने कहा कि बढ़ते पारे से फिलहाल कोई चिंता नहीं है। गेहूं की फसल पर कोई बुरा असर नहीं हुआ।
मौसम विभाग ने बारिश का अनुमान जारी किया है। वेस्टर्न हिमालय के क्षेत्र में बारिश का अनुमान किया है। कुछ इलाकों में बर्फबारी का भी अनुमान जताया। पंजाब, हरियाणा,पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी बारिश का अनुमान जताया है।मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश, राजस्थान में भी हल्की बारिश हो सकती है।
गिरा इंपोर्ट, बढ़ी बिक्री
31 दिसंबर तक यूरिया की बिक्री 6.4% बढ़ी है जबकि सभी फर्टिलाइजर की बिक्री 7.3% बढ़ी है।फर्टिलाइजर की बिक्री 525.92 लाख टन रही। 31 दिसंबर तक DAP की बिक्री में गिरावट आई। अप्रैल-दिसंबर में यूरिया का इंपोर्ट 29% गिरा जबकि कुल फर्टिलाइजर का इंपोर्ट 18% गिरा। सरकार का 2025 तक फर्टिलाइजर में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य है।
देश में फर्टिलाइजर का कुल उत्पादन करीब 2% बढ़ा है जबकि अप्रैल-दिसंबर के बीच 391.62 लाख टन का उत्पादन रहा। 31 दिसंबर 2023-24 में यूरिया की बिक्री 282.08 लाख टन पर रहा जबकि 31 दिसंबर 2024-25 में 300.26 लाख टन पर रहा। अप्रैल-दिसंबर में DAP की बिक्री 12.7 फीसदी गिरी है जबकि म्यूरेट ऑफ पोटाश की बिक्री 31.6 फीसदी बढ़ी है। वहीं कॉम्प्लेक्स की बिक्री में 27.1 फीसदी का इजाफा हुआ है।