Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जा सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि अब पूरा खेल चीन की खरीदारी पर निर्भर करेगा। जानिए OPEC+ की बढ़ती सप्लाई, वैश्विक मांग और ऑयल मार्केट के आगे के आउटलुक का पूरा हिसाब।

अपडेटेड Jul 06, 2026 पर 6:53 PM
Christof Ruehl का मानना है कि आने वाले वर्षों में OPEC के सामने बड़ी चुनौती आ सकती है।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में इस साल बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। Crystol Energy के ग्लोबल एडवाइजर Christof Ruehl का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो कच्चे तेल का भाव 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकता है। फिलहाल, कच्चा तेल 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

हालांकि, इसमें सबसे बड़ा रोल चीन का होगा। अगर चीन अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को भरने में देरी करता है, तो कीमतों पर और दबाव आ सकता है।

सप्लाई ज्यादा होगी, मांग घटेगी


Christof Ruehl का कहना है कि आने वाले महीनों में तेल का उत्पादन खपत से ज्यादा रह सकता है। उनके मुताबिक, Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हाल के भू-राजनीतिक तनाव भी कम हुए हैं। इसका मतलब है कि बाजार में तेल की सप्लाई पहले के मुकाबले आसान होगी।

उनका मानना है कि साल की दूसरी छमाही में तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक चीन तय करेगा। सवाल सिर्फ इतना है कि चीन तेल कब खरीदता है और कितनी मात्रा में खरीदता है।

60 डॉलर से नीचे क्यों जा सकता है तेल?

Christof Ruehl का कहना है कि अगर चीन सस्ती कीमत का इंतजार करता है और खरीदारी टाल देता है, तो कच्चे तेल का भाव कुछ समय के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे भी जा सकता है।

हालांकि, उन्हें यह भी लगता है कि 60 डॉलर के नीचे जाते ही चीन अपने रणनीतिक भंडार को भरने के लिए बड़ी खरीदारी शुरू कर सकता है। ऐसा हुआ, तो कीमतों को सहारा मिल सकता है।

OPEC+ भी बढ़ा रहा है उत्पादन

तेल की सप्लाई बढ़ने की एक और वजह OPEC+ है। Ruehl का कहना है कि OPEC+ देशों ने हाल ही में उत्पादन बढ़ाया है। इसके अलावा UAE, रूस, इराक और ईरान जैसे देश भी ज्यादा तेल निकाल रहे हैं।

यानी बाजार में तेल की कमी नहीं दिख रही। सप्लाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

OPEC के सामने भी मुश्किल

Christof Ruehl का मानना है कि आने वाले वर्षों में OPEC के सामने बड़ी चुनौती आ सकती है। अगर दुनिया में तेल की मांग अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर घटने लगती है, तो तेल उत्पादक देशों के बीच बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई और तेज हो जाएगी।

उनका कहना है कि अगर भविष्य में 2025 को 'पीक ऑयल डिमांड' का साल माना गया, तो यह पूरी ऑयल इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में और देश UAE की तरह OPEC छोड़ने का फैसला करते हैं, तो बाकी सदस्य देशों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव और बढ़ जाएगा।

अभी सबसे बड़ा फैक्टर क्या है?

Christof Ruehl का मानना है कि फिलहाल तेल की कीमतों के लिए सबसे बड़ा जोखिम गिरावट का है। बशर्ते कोई नया बड़ा भू-राजनीतिक संकट न खड़ा हो।

हालांकि, उनके मुताबिक 60 डॉलर प्रति बैरल का स्तर काफी अहम है। अगर कीमतें इससे नीचे जाती हैं, तो चीन बड़ी खरीदारी करके बाजार को सहारा दे सकता है। यही वजह है कि आने वाले महीनों में पूरी दुनिया की नजर चीन की खरीदारी पर रहेगी।

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