क्रूड की कीमतें 2 फीसदी गिरी, क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाएंगी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां?

अमेरिका और ईरान में एग्रीमेंट से ईरान को अपने ऑयल बेचने की इजाजत मिल गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी। ईरान क्रूड का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है

अपडेटेड Jun 26, 2026 पर 12:45 PM
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है। ऑयल टैंकर की आवाजाही शुरू होने से क्रूड की सप्लाई अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी है।

क्रूड की कीमतें 26 जून को करीब 2 फीसदी क्रैश कर गईं। यह क्रूड में बड़ी गिरावट वाला हफ्ता है। अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है। ऑयल टैंकर की आवाजाही शुरू होने से क्रूड की सप्लाई अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है।

ईरान को मिली तेज बेचने की इजाजत

ब्रेट क्रूड फ्यूचर्स 1.47 डॉलर यानी 1.47 फीसदी गिरकर 73.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.44 डॉलर यानी 2 फीसदी गिरकर 70.48 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।अमेरिका और ईरान में एग्रीमेंट से ईरान को अपने ऑयल बेचने की इजाजत मिल गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी। ईरान क्रूड का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है।


क्रूड 126 डॉलर तक पहुंच गया था

क्रूड की कीमतों में लगातार गिरावट भारत के लिए अच्छी खबर है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में उछाल आया था। 30 अप्रैल को क्रूड का भाव 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में कीमतें इस लेवल से नीचे आ गई थी, लेकिन ज्यादातर समय यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। इससे भारत का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

क्रूड में उछाल से बढ़ी थी पेट्रोल और डीजल की कीमतें

क्रूड में उछाल के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भारत में कई बार पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाई थीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अचानक क्रूड में नरमी के बावजूद छइन कंपनियों के अपनी कीमतें घटाने की उम्मीद नहीं है। इसका मतलब है कि आगे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है। हालांकि, भारत में दूसरे देशों के मुकाबले पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कम बढ़ी थीं।

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भारत जरूरत का 90 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी क्रूड इंपोर्ट से पूरा करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आने पर सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बन जाता है। इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। अब रुपये में रिकवरी दिख रही है।

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