सरकार ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को और बेहतर बनाने के लिए इसके नियमों में बदलाव किया है। नई स्कीम में सभी सरकारी बैंकों के साथ ज्वेलर्स को भी शामिल किया जा रहा है। साथ ही मिनिमम निवेश लिमिट को भी घटाकर 10 ग्राम गोल्ड कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि नई स्कीम में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी, साथ ही ये इकोनॉमी के लिए भी गेमचेंजर साबित होगा। नई स्कीम आपके लिए कितना फायदेमंद होने वाली है आइए जानते हैं।

आ गई नई गोल्ड मोनेटाइजेशन !

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में कई बड़े बदलाव के साथ नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई है। इसमें सभी PSU बैंक को GMS में हिस्सा लेने की सलाह दी गई है। अब सरकारी बैंकों की 1/3 शाखाओं को सर्विस ब्रांच बनाया जाएगा। प्राइवेट बैंकों को भी GMS में हिस्सा लेने की सलाह दी गई है। इस स्कीम के तहत बैंकों में सोना जमा कर सकते हैं। बैंकों में जमा सोना पर 2.25 फीसदी का ब्याज मिलता है। अब लोअर निवेश लिमिट 30 ग्राम से घटकर 10 ग्राम कर दी गई है। नई स्कीम में ज्वेलर्स को भी शामिल किया गया है। ज्वेलर्स शुद्धता जांच और कलेक्शन का काम करेंगे।

नई स्कीम में क्या होगा?

नई स्कीम में सभी सरकारी बैंक को हिस्सा लेने की सलाह दी गई है। बैंकों की 1/3 शाखाओं को सर्विस ब्रांच बनाया जाएगा। प्राइवेट बैंकों को भी स्कीम में हिस्सा लेने की सलाह दी गई है। स्कीम में लोअर निवेश लिमिट घटाकर 10 ग्राम गोल्ड कर दिया गया है। पहले कम से कम 30 ग्राम सोना निवेश करना जरुरी था। स्कीम में सोना जमा करने की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। जमा किए गोल्ड के वैल्यू पर 2.25 फीसदी सालाना ब्याज मिलेगा। स्कीम के लिए पोर्टल और ऐप भी लॉन्च किए जाएंगे। MLRGD गोल्ड के लिए SBI कस्टोडियन होगा। अब R-GDS सर्टिफिकेट Tradable & Transferable होंगे और ज्वेलर्स को गोल्ड मोबलाइजेशन एजेंट बनाया जाएगा। नई स्कीम में ज्वेलर्स शुद्धता जांच और कलेक्शन का काम करेंगे। बैंक और रिफाइनर्स को CPTC के साथ समझौता करना होगा। बैंकों को 1 फीसदी कमीशन और 1.5 फीसदी हैंडलिंग चार्ज मिलेगा।

क्या है गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम?

इसमें घरों में रखा सोना बैंकों में जमा करने का विकल्प मिलता है। इसके जरिए आप घर में रखे सोने पर कुछ इनकम कर सकते हैं। गोल्ड की मार्केट वैल्यू पर 2.25 फीसदी सालाना ब्याज भी मिलता है। इसके तहत आप बैंकों में ज्वेलरी, सोने का सिक्का और गोल्ड बार जमा कर सकते हैं। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2015 में शुरु की गई थी। इसका मकसद घरों और ट्रस्ट का सोना बाहर लाना और उसका उपयोग करना था। इसमें मध्यम अवधि में 5-7 साल के लिए जमा करने का विकल्प है। वहीं, लंबी अवधि में 12 साल के लिए सोना जमा कर सकते हैं।


इकोनॉमी के लिए गेमचेंजर

ये स्कीम अगर सफल रहे तो इकोनॉमी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इसका मकसद घरों, ट्रस्ट का सोना बाहर लाना और उसका उपयोग करना है।
इससे सोने के मालिक को भी आमदनी और इकोनॉमी को भी फायदा होगा। इसके जरिए घरों में पड़े सोने का इस्तेमाल देश की ग्रोथ में हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक घरों और ट्रस्ट में करीब 25000 टन सोना पड़ा है। बैंकों के पास सोना पहुंचने से सोने का आयात घटेगा। आयात घटने से CAD कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। इस स्कीम से बैंकों के साथ ज्वेलरी सेक्टर को भी फायदा होगा।


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