Gold Rate: सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड, 2025 में अब तक 35% हुआ महंगा, क्या ये है निवेश का सही समय?

Gold Price: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों और कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सोने के दामों में जोरदार उछाल ला दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने की कीमत 1,07,807 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस पूरे हफ्ते के दौरान सोने के भाव में 3.80% की तेजी आई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड का भाव 3,653.30 रुपये प्रति औंस पर बंद हुआ

अपडेटेड Sep 06, 2025 पर 6:40 PM
Gold Price: गोल्डमैन सैक्स ने सोने की कीमत के 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है

Gold Rate Today: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों और कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सोने के दामों में जोरदार उछाल ला दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने की कीमत 1,07,807 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस पूरे हफ्ते के दौरान सोने के भाव में 3.80% की तेजी आई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड का भाव 3,653.30 रुपये प्रति औंस पर बंद हुआ। इस साल की शुरुआत से अब तक सोने का भाव लगभग 35% चढ़ चुका है।

क्यों बढ़ रहा सोने का दाम?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने 16-17 सितंबर को होने वाली अपनी आगामी बैठक के दौरान ब्याज दरों में कटौती का संकेत दिया है। अमेरिकी इकोनॉमी के कमजोर आर्थिक आंकड़ों से भी इस रेट कट की उम्मीदों को मजबूती मिली है। अमेरिका में अगस्त महीने के दौरान नॉन-फार्म पेरोल सिर्फ 22,000 बढ़ा, जबकि उम्मीद 75,000 की थी। बेरोजगारी दर भी 4.3% तक बढ़ गई। इससे फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती लगभग तय मानी जा रही है।

इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन की टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई है। केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है। पिछले तीन सालों से केंद्रीय बैंक हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा रहे हैं। इससे ग्लोबल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 24% तक पहुंच गई है, जो तीन दशक का उच्च स्तर है।


क्या अभी सोना खरीदना सही है?

स्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई ने कहा, "अमेरिकी लेबर मार्केट में लगातार कमजोरी के कारण सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि तकनीकी संकेतक बताते हैं कि हालिया तेजी के बाद सोना ओवरबॉट जोन में प्रवेश कर सकता है, लेकिन कीमतों को निचले स्तरों पर अभी भी मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।"

मेहता इक्विटीज के कमोडिटीज वाइसप्रेसिडेंट राहुल कलंत्री ने कहा कि निवेशकों ने पेरोल रिपोर्ट से पहले ही मुनाफावसूली कर ली थी। उन्होंने कहा कि उन्हें सोने के लिए 3,500-3,530 डॉलर प्रति औंस पर सपोर्ट और 3,570-3,590 डॉलर प्रति औंस पर रजिस्टेंस नजर आ रहा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में अभी भी मजबूती बनी रह सकती है। घरेलू बाजार में सोना 1,05,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मजबूत आधार बना चुका है और अगला लक्ष्य 1,10,000 रुपये तक हो सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का भाव जल्द ही 3,640 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है।

गोल्डमैन सैक्स ने तो सोने की कीमत के 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज का कहना है कि अगर अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट का सिर्फ 1% हिस्सा भी सोने में शिफ्ट होता है, तो दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं।

सोने में निवेश की क्या हो रणनीति?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड ETF में निवेश इस समय फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सावधानी जरूरी है। लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना पोर्टफोलियो में विविधता और महंगाई से बचाव का अच्छा साधन है। हालांकि, अल्पकालिक निवेशकों के लिए रिस्क ज्यादा है क्योंकि दाम पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के निवेशकों थोड़ी-थोड़ी रकम नियमित अंतराल पर लगाने की रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि ऊंचे स्तर पर खरीदने का जोखिम संतुलित हो सके।

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