Silver Gold Price Outlook : सितंबर में 6% टूटा सोना, जानिए अब क्या होंगे इसके लिए तेजी के ट्रिगर्स
Silver Gold Price OUtlook : जुलाई-अगस्त में 11 प्रतिशत की तेजी के बाद, इस महीने सोने की कीमतों में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि निकट भविष्य में गोल्ड पर दबाव बना रह सकता है
Gold Rate Today : अगर फेड की तरफ से कोई नरम रुख देखने को मिलता है या ईरान के साथ बातचीत में ठोस प्रगति होती है तो सोने की कीमत में तेजी आ सकती है और यह रेजिस्टेंस लेवल की ओर बढ़ सकता है
Silver Gold Price OUtlook : सोने की तेजी की रफ्तार धीमी पड़ रही है। US ट्रेज़री यील्ड में बढ़ोतरी और फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों का असर इस नॉन-यील्डिंग एसेट पर भारी पड़ रहा है। जुलाई और अगस्त में 11 प्रतिशत की बढ़त के बाद,इस महीने अब तक सोने में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह अभी $4,300 प्रति औंस के आसपास बना हुआ है।
फेड द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ने से सोने पर दबाव बढ़ गया है। CME FedWatch टूल के मुताबिक अब अक्टूबर में 25-बेसिसपॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 68 प्रतिशत है,जो एक हफ़्ते पहले 57 प्रतिशत थी। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बढ़त से सोने का आकर्षण कम हो जाता है,क्योंकि यह एक नॉन-यील्डिंग एसेट है।
बढ़ती बॉन्ड यील्ड निकट भविष्य में सोने के लिए सबसे बड़ी दिक्कत
सोने के लिए सबसे बड़ी तात्कालिक बाधा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेज बढ़त है। अमेरिका में 30 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है, जो दो दशकों से अधिक का इसका उच्चतम स्तर है।
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट्स का कहना है कि हाई यील्ड नॉन-यील्डिंग एसेट सोने अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट को बढ़ाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी वित्तीय चिंताओं के कारण भी सोना अपने हाल के उच्चतम स्तर से नीचे बना हुआ है।
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी से सपोर्ट
एनालिस्ट्स का मानना है कि सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी से सोने को स्ट्रक्चरल सपोर्ट मिल रहा है। मैकगायर ने बताया कि ऊंची कीमतों और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के बावजूद सेंट्रल बैंक गर्मियों के दौरान भी सोना खरीदते रहे।
पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने अगस्त में 20.2 टन सोना खरीदा,जो 2023 के आखिर के बाद से उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद थी। जबकि पोलैंड इस साल सबसे ज़्यादा सोना खरीदने वालों में शामिल रहा। अगस्त में यूरोपियन फंड्स में भी गोल्ड ETF में पॉज़िटिव नेट इनफ़्लो देखा गया। इस खरीद से कीमतों में गिरावट (करेक्शन) सीमित हो सकती है, क्योंकि सेंट्रल बैंक कमज़ोरी के दौर का इस्तेमाल अपने रिज़र्व को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
सोने को एक फ्रेश ट्रिगर की जरूरत
वेंचुरा में कमोडिटी और CRM के हेड,एन एस रामास्वामी का मानना है कि अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत बने रहते हैं,तो निकट भविष्य में सोने की कीमत एक दायरे में रहेगी या थोड़ी गिर सकती है। COMEX पर,उन्हें $4,200-$4,250 पर सपोर्ट और $4,360-$4,450 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है। MCX पर,सपोर्ट ₹1,49,000-₹1,50,000 पर है,जबकि रेजिस्टेंस ₹1,53,000-₹1,54,000 पर दिख रहा है।
PL कैपिटल में कमोडिटीज के हेड, आशीष राजोदिया का कहना है कि MCX गोल्ड (दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट)आज ₹2,700 यानी 1.80% गिरकर ₹1,50,500 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। इसमें लगातार दूसरे हफ़्ते गिरावट जारी है। यह दबाव US ट्रेजरी बॉन्ड की भारी बिकवाली की वजह से है। अमेरिका में 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 5.13% (2007 के बाद सबसे ज़्यादा) और 30 की बॉन्ड यील्ड 5.44% (2004 के बाद सबसे ज़्यादा) पर है। CME FedWatch डेटा से पता चलता है कि बाज़ार अब 28 अक्टूबर की मीटिंग में फेडरल रिज़र्व द्वारा दरों में 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की 68.1% संभावना मान रहा है (जबकि दरों को स्थिर रखने की संभावना सिर्फ़ 31.9% है)। मज़बूत आर्थिक डेटा और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर US-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण एनर्जी से जुड़ी महंगाई की चिंताओं की वजह से दरों में बढ़त की आशंका बढ़ी है।
आम तौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव के समय कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सोने को सेफ-हेवन (सुरक्षित निवेश) के तौर पर आकर्षक बनाती हैं,लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। इसके बजाय कच्चे तेल की कीमतें फेड द्वारा इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना को मजबूत कर रही हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और यील्ड कर्व भी तेज हो रहा है। ये दोनों ही बातें प्रेशियस मेटल्स (जैसे सोना) के लिए नुकसानदेह हैं।
सोने के लिए ₹1,48,000 और ₹1,46,000 पर सपोर्ट है,जबकि ₹1,52,500 और ₹1,55,000 पर रेजिस्टेंस है। सोने की अगली चाल मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करेगी। ये हैं फेड का अक्टूबर में ब्याज दरों पर फैसला और होर्मुज को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में शुरू हुई बातचीत।
अगर फेड की तरफ से कोई नरम रुख (डविश सरप्राइज) देखने को मिलता है या ईरान के साथ बातचीत में ठोस प्रगति होती है तो सोने की कीमत में तेजी आ सकती है और यह रेजिस्टेंस लेवल की ओर बढ़ सकता है। वहीं,अगर फेड का रुख सख्त (हॉकिश) बना रहता है या ईरान के साथ बातचीत रुक जाती है तो सोने की कीमत में गिरावट जारी रह सकती है और यह निचले सपोर्ट लेवल की ओर जा सकता है।
कुल मिलाकर कहें तो सोने की स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। सेंट्रल बैंक की मांग और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) विकल्प के तौर पर सोने को सपोर्ट मिल रहा है। लेकिन इसकी कीमत में नई तेजी के लिए शायद यील्ड के कम होने,डॉलर के कमजोर होने या फिर जियोपॉलिटिकल जोखिमों के बढ़ने का इंतजार करना पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।