Gold Vs Real Estate: गोल्ड या रियल एस्टेट, इनवेस्टमेंट के लिए कौन सही है?

गोल्ड बहुत लिक्विड है। इसका मतलब यह है कि जरूरत पड़ने पर आप इसे बेचकर पैसा हासिल कर सकते हैं। मुसीबत के वक्त यह बहुत काम आता है। अब तो गोल्ड लोन कंपनियां सोना पर लोन भी दे रही हैं

अपडेटेड Mar 23, 2022 पर 4:00 PM
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सोने और रियल एस्टेट में एक बड़ा फर्क यह है कि रियल एस्टेट को आप इस्तेमाल भी करते हैं। सोना लॉकर में बंद रहता है, जबकि रियल एस्टेट को आप खुद के रहने के लिए या किराया कमाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

इनवेस्टमेंट के लिए आज कई ऑप्शंस हैं। सही ऑप्शन के चुनाव से आप इनवेस्टमेंट पर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। इनवेस्टमेंट से पहले आपको इस्ट्रूमेंट से जुड़े रिस्क, इनवेस्टमेंट का मकसद और इंस्ट्रूमेंट की लिक्विडिटी का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं तो गोल्ड (Gold) और रियल एस्टेट (Real Estate) अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं। आइए देखते हैं इनवेस्टमेंट के लिए दोनों में से कौन आपके लिए सही है।

सोने के साथ सेंटिमेंट वैल्यू जुड़ा है

सोना कई मामलों में इनवेस्टमेंट के दूसरे ऑप्शंस से अलग है। इंडियन लोगों के लिए सोने का सेंटिमेंट वैल्यू खास मायने रखता है। सोना ऐसा इनवेस्टमेंट है, जो आपको सुरक्षा देता है। शादी में पिता अपनी बेटी को इसे गिफ्ट में देते हैं। फिर, यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को ट्रांसफर होता रहता है। इसकी दूसरी खासियत यह है कि अपनी जरूरत के हिसाब से इसे खरीदा जा सकता है। आप स्मॉल अमाउंट से लेकर बड़े अमाउंट का इस्तेमाल गोल्ड खरीदने के लिए कर सकते हैं।


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गोल्ड रियल एस्टेट के मुकाबले ज्यादा लिक्विड है

गोल्ड बहुत लिक्विड है। इसका मतलब यह है कि जरूरत पड़ने पर आप इसे बेचकर पैसा हासिल कर सकते हैं। मुसीबत के वक्त यह बहुत काम आता है। अब तो गोल्ड लोन कंपनियां सोना पर लोन भी दे रही हैं। आप अपने सोने को कंपनी के पास गिरवी रख लोन लीजिए। फिर लोन का पैसा चुकाने के बाद अपना सोना वापस ले लीजिए। लोन की अवधि में आपको इंट्रेस्ट चुकाना होता है।

सही प्रॉपर्टी का सेलेक्शन बहुत मायने रखता है

रियल एस्टेट भी इनवेस्टमेंट के पुराने माध्यमों में से एक है। अगर आपने सोचसमझ कर प्रॉपर्टी का चुनाव किया है तो यह कुछ सालों में आपको कई गुना रिटर्न दे सकता है। रियल एस्टेट का रिटर्न गोल्ड के मुकाबले ज्यादा रहता है। लेकिन, यह प्रॉपर्टी के लोकेशन पर डिपेंड करता है। इसमें रिस्क कम है। सोने की तरह इसकी कीमतें रोज चढ़ती-उतरती नहीं हैं।

रियल एस्टेट का इस्तेमाल खुद के लिए कर सकते हैं

सोने और रियल एस्टेट में एक बड़ा फर्क यह है कि रियल एस्टेट को आप इस्तेमाल भी करते हैं। सोना लॉकर में बंद रहता है, जबकि रियल एस्टेट को आप खुद के रहने के लिए या किराया कमाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस दौरान इसकी वैल्यू भी बढ़ती रहती है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में रियल एस्टेट में इनवेस्टमेंट की चाहत बढ़ी है।

अपनी जरूरत और रिस्क कैपेसिटी को देख लें फैसला

इसलिए दोनों में से आपके लिए कौन सही है, इसका फैसला आपको खुद करना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलग-अलग माध्यमों में निवेश पोर्टफोलियो की सिक्योरिटी के लिए अच्छा रहता है। इसलिए अगर आपके पास पैसा है तो आप रियल एस्टेट में इनवेस्ट करने के बारे में सोच सकते हैं। यह ध्यान रखना होगा कि सोने की तरह इसमें आप स्मॉल अमाउंट इनवेस्ट नहीं कर सकते हैं। इसके लिए ज्यादा पैसा चाहिए।

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