सरकार दालों की जमाखोरी को रोकने के लिए सख्त रवैया अपनाने जा रही है। विशेष रूप से तुअर और उड़द दालों की जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने आदेश जारी किया है। सरकार ने तुअर और उड़द पर इंपोर्टर्स को आदेश दिया है। अपने आदेश में सरकार ने सीधे शब्दों में कहा है कि इंपोर्टर्स इंपोर्ट किए हुए तुअर और उड़द के स्टॉक को 30 दिनों से ज्यादा अपने पास न रखें। इसके साथ ही राज्यों से भी कहा कि वो इंपोर्टर्स को स्टॉक एडवाइजरी के नियमों का भी पालन करने को कहें। पिछले कुछ दिनों से उड़द और तुअर के दालों की कीमतें बढ़ती हुई देखी गई हैं। इसके चलते सरकार की तरफ ये हिदायत जारी की गई है।
इस बारे में सरकारों की आपस में भी बैठक हो रही हैं। इसमें इपोर्टर्स को सरकार की तरफ से जमाखोरी नहीं करने का आदेश दिया गया है। ऐसी खबरें आईं थी कि कुछ इंपोर्टर्स म्यांमार में ही अपने स्टॉक्स को होल्ड कर रहे हैं। ऐसी भी जानकारी मिली थी कि जो इंडियन इंपोर्टर्स हैं वे आगे के वायदे के लिए भाव बढ़ा कर बात कर रहे हैं। लिहाजा सरकार ने इंपोर्टर्स को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे 30 दिनों से ज्यादा तुअर और उड़द के स्टॉक अपने पास होल्ड नहीं करें। केंद्र सरकार ने राज्य सरकरों से भी कहा है के वे स्टॉक नियमों का पालन न होने पर कार्रवाई करें।
इस मुद्दे पर हमारे सहयोगी चैनल सीएनबीसी-आवाज़ के साथ Suumaya Industries के Chief Growth Officer दीपक पारीक ने बात की। जब उनसे पूछा गया कि इंपोर्टर्स क्यों उड़द और तुअर की जमाखोरी कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सारे इंपोर्टर्स इसकी जमाखोरी कर रहे हैं। सिर्फ 2-3% लोग ही जमाखोरी कर रहे हैं। इससे कीमतों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक कीमतों में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं है।
दीपक पारीक ने आगे कहा कि बाजार में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई। अगले 2 महीने भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। इसकी वजह ये है कि अगले 2 महीनों में साउथ अफ्रीका सप्लाई आने की उम्मीद है। वहीं ईस्ट अफ्रीका में इसके उत्पादन घटने की आशंका भी जताई जा रही है। जबकि म्यांमार में तुअर का स्टॉक कम बचा है।
माना जा रहा है कि इन सबके चलते तुअर के दाम 8-10% बढ़ सकते हैं। इसकी वजह से तुअर का होलसेल भाव 110-115/किलो तक जा सकता है।