भारत का रूस से कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात मई में बढ़कर रहा 6.7 अरब डॉलर, बना हुआ है दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापारिक प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा कारोबार में बदलाव आया था। इसके बाद भारत, रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही, जबकि भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा

अपडेटेड Jun 14, 2026 पर 8:44 AM
मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही।

भारत मई 2026 में भी रूसी जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। भारतीय रिफाइनरियों के खरीद बढ़ाने से रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़कर अनुमानित 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह बात यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट से सामने आई है। इसमें कहा गया है कि मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही। इसकी वैल्यू 4.8 अरब यूरो थी। इसके अलावा तेल उत्पादों का आयात 55 करोड़ यूरो और कोयले का आयात 42.9 करोड़ यूरो का रहा।

CREA ने कहा कि मई में भारत का कच्चे तेल का कुल आयात मासिक आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा। इसका एक प्रमुख कारण रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। गुजरात स्थित देश के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की आवक (अराइवल) में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में मई में 36 प्रतिशत अधिक रूसी तेल उतारा गया, जबकि जामनगर रिफाइनिंग परिसर में यह वृद्धि 14 प्रतिशत की रही।

सरकारी रिफाइनरी कंपनियों की कैसी रही खरीद


रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों ने भी इस वर्ष की शुरुआत में रूस से आयात दोबारा शुरू करने के बाद खरीद बढ़ाई है। नवंबर, 2025 के अंत में रूसी कच्चे तेल का आयात रोकने वाली न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने मार्च से दोबारा खरीद शुरू की। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति मासिक आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में इसमें 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी में भी मई महीने में पिछले दो साल में रूसी कच्चे तेल की सर्वाधिक मात्रा उतारी गई। इससे संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी दबावों के बावजूद रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए आकर्षक बना हुआ है।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापारिक प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा कारोबार में बदलाव आया था। इसके बाद भारत, रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। भारतीय रिफाइनरी इकाइयों ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर ऊर्जा लागत कम करने के साथ रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी सहारा दिया है।

प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भेजे गए 64.1 करोड़ यूरो के ऑयल प्रोडक्ट

रिपोर्ट के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही, जबकि भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद तुर्किये (6 प्रतिशत) और यूरोपीय संघ (5 प्रतिशत) का स्थान रहा। भारत, तुर्किये, ब्रुनेई और जॉर्जिया में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल करने वाली रिफाइनरियों ने मई 2026 में प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 64.1 करोड़ यूरो के ऑयल प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए। इंपोर्ट करने वाले देशों में EU (17.4 करोड़ यूरो), ऑस्ट्रेलिया (27.5 करोड़ यूरो), अमेरिका (14.7 करोड़ यूरो) और न्यूजीलैंड (4.5 करोड़ यूरो) शामिल थे। अनुमान है कि इनमें से 21.4 करोड़ यूरो के प्रोडक्ट्स रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए।

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