सोना-चांदी के बाद अब 'कॉपर' कराएगा मोटी कमाई? जानें कैसे और कहां कर सकते हैं निवेश
Copper Investment: सोना और चांदी के बाद अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिकने लगी है। पिछले एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं। शेयर बाजार की सुस्ती के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर इन कमोडिटी में निवेश की ओर बढ़ा है। इसी कड़ी में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या कॉपर अगला बड़ा दांव बन सकता है?
Copper Investment: भारत में अभी तक कॉपर ETF या कॉपर म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं
Copper Investment: सोना और चांदी के बाद अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिकने लगी है। पिछले एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं। शेयर बाजार की सुस्ती के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर इन कमोडिटी में निवेश की ओर बढ़ा है। इसी कड़ी में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या कॉपर अगला बड़ा दांव बन सकता है और क्या इसमें रिटेल निवेशक भी निवेश कर सकते हैं।
गोल्ड-सिल्वर की रैली के बाद कॉपर पर नजर
पिछले कुछ महीनों में गोल्ड और सिल्वर की तेज उछाल ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, ETF और म्यूचुअल फंड के जरिए गोल्ड-सिल्वर में निवेश में तेज उछाल देखने को मिला है। अब जबकि दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड स्तरों पर कारोबार कर रही हैं, निवेशकों में अगली संभावित कमोडिटी तलाशने की बेचैनी दिख रही है और इसी कारण कॉपर चर्चा में आ गया है।
रिकॉर्ड स्तर पर कॉपर की कीमतें
गोल्ड और सिल्वर की चमक के बीच बेस मेटल कॉपर को निवेशकों ने काफी समय तक नजरअंदाज किया, लेकिन अब इसमें भी तेज उछाल दिख रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के आंकड़ों के अनुसार, कॉपर मार्च 2022 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर 6 जनवरी 2026 को कॉपर ने $6.069 प्रति पाउंड का नया रिकॉर्ड बनाया, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 60% की बढ़त दर्शाता है। 10 जनवरी को यह हल्की गिरावट के साथ करीब $5.85 प्रति पाउंड के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत में भी कॉपर फ्यूचर्स ने बीते एक साल में लगभग 36% की तेजी दिखाई है, जिससे यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटीज में से एक बन गया है।
तेजी के पीछे क्या हैं कारण?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कॉपर की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) सेक्टर का विस्तार, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेदी से बढ़ना, डिफेंस सेक्टर में मजबूत मांग और सबसे अहम कॉपर की सीमित सप्लाई, ये सभी फैक्टर्स मिलकर कॉपर की कीमतों को मजूबती दे रहे हैं।
VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल ने बताया, “कॉपर की तेजी यह दिखाती है कि फिजिकल सप्लाई सीमित है, जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी मांग लगातार बढ़ रही है। कमजोर डॉलर और नरम ब्याज दरों की उम्मीदों ने भी निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता को बढ़ाया है।”
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पास अतिरिक्त कॉपर स्टॉक है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में कमी बनी हुई है। इससे ग्लोबल मार्केट्स में कॉपर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
क्या रिटेल निवेशक कॉपर में निवेश कर सकते हैं?
इस सवाल का सीधा जवाब फिलहाल “नहीं” है। भारत में अभी तक कॉपर ETF या कॉपर म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं, न ही फिजिकल कॉपर बार या कॉइन में निवेश का कोई संगठित विकल्प मौजूद है।
रिटेल निवेशकों के लिए फिलहाल इकलौता रास्ता है- कॉपर फ्यूचर्स। भारत में यह ट्रेडिंग मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर होती है, लेकिन यहां जोखिम भी काफी ज्यादा है।
कॉपर फ्यूचर्स का एक कॉन्ट्रैक्ट 2.5 टन का होता है, जिससे एक्सपोजर बहुत बड़ा हो जाता है। हालांकि फ्यूचर्स में केवल मार्जिन देना होता है, लेकिन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से नुकसान भी उतनी ही तेजी से हो सकता है। इसलिए यह विकल्प उन्हीं निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जाता है, जिन्हें कमोडिटी बाजार और रिस्क मैनेजमेंट की अच्छी समझ हो।
कुल मिलाकर, भारत में रिटेल निवेशकों के लिए कॉपर में सीधा और सुरक्षित निवेश अभी आसान नहीं है। यही कारण है कि रिटेल हिस्सेदारी अभी भी सीमित है।
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