ओपेक (OPEC) और रूस सहित अन्य बड़े तेल उत्पाक देशों के समूह ने आखिरकार अपनी जिद छोड़ते जुलाई महीने से तेल उत्पादन (Oil Production) में रोजाना 6.48 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। यह रोजाना 4.32 लाख बैरल की हुई पिछली बढ़ोतरी से काफी अधिक है।
ओपेक और रूस सहित करीब 23 बड़े तेल उत्पादों देश के समूह ओपेक प्लस (OPEC Plus) की गुरुवार को बुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इन देशों ने अभी तक सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे तेल उत्पादन बढ़ाने की नीति अपनाई हुई थी। हालांकि अब तेल उत्पादन में इस बढ़ोतरी के फैसले से इस कदम से ऊर्जा के ऊंचे दाम और इसके चलते बढ़ती महंगाई को रोकने में कुछ राहत मिलेगी।।
यह खबर ऐसे समय में आई है कि जब दुनिया भर में तेल और गैस की अधिक कीमत के चलते ग्लोबल ग्रोथ के धीमी होने की आशंका बढ़ गई है। तेल और गैस की अधिक कीमतों ने वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ाने में अहम योगदान दिया है और इससे भारत, अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में लोगों की खरीद शक्ति घटी है।
कोरोना महामारी के दौरान तेल की सप्लाई और मांग दोनों लगभग नगण्य थी। ऐसे में ओपेक प्लस देशों ने उत्पादन भी घटा दिया था। बाद में जब महामारी का असर खत्म हुआ तो इन देशों ने रोजाना 4.32 लाख बैरल की धीमी बढ़ोतरी के साथ तेल उत्पादन को पूर्व-स्तर पर लाने का ऐलान किया।
ओपेक देशों की अगुआई करने वाले सऊदी अरब से अमेरिका सहित कई देशों ने लगातार अपना उत्पादन बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन ओपेक देश इस पर राजी नहीं हुए। हाल ही में यूक्रेन पर युद्ध के बाद जब यूरोपीय देशों ने रूस से तेल खरीदना कम करने का ऐलान किया, तब भी इन देशों से उत्पादन बढ़ाकर सप्लाई को सुनिश्चित करने की अपील की थी, लेकिन ओपेक पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था।
इस बीच, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 2.8 प्रतिशत गिरकर 112.01 डॉलर पर रही, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 2.73 प्रतिशत टूटकर 113.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।