ExpressVPN ने भारत में सर्वर्स बंद किए, इसका आप पर भी पड़ सकता है असर, जानिए कैसे

VPN का मतलब Virtual Private Network है। इसकी मदद से आप पब्लिक नेटवर्क्स की मदद से प्रोटेक्टेड नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आम तौर पर कंपनियां प्रोटेक्टेड नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल करती हैं ताकि कोई बाहरी व्यक्ति उनके नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सके

अपडेटेड Jun 02, 2022 पर 5:09 PM
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एक अनुमान के मुताबिक, इंडिया में 27 करोड़ वीपीएन यूजर्स हैं।

ExpressVPN ने इंडिया में अपने सर्वर्स बंद कर दिए हैं। इसकी वजह इंडिया में सरकार का नया नियम है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने 28 अप्रैल को एक आदेश जारी किया था। इसमें वीपीएन सेवाएं देने वाली कंपनियों को यूजर के डेटा कलेक्ट और स्टोर करने के लिए कहा गया है। ExpressVPN का कहना है कि सरकार के नए नियमों का पालन करने मुमकिन नहीं है।

ExpressVPN इसे इंटरनेट फ्रीडम के खिलाफ बताया है। वीपीएन सेवाएं देने वाली कुछ दूसरी कंपनियों ने भी सरकार ने नए नियम की आलोचना की है। अगर वीपीएन सेवाएं देने वाली कंपनियां अपनी सेवाएं बंद कर देती हैं इससे वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने वाले लोगों पर असर पड़ सकता है।

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VPN का मतलब Virtual Private Network है। इसकी मदद से आप पब्लिक नेटवर्क्स की मदद से प्रोटेक्टेड नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आम तौर पर कंपनियां प्रोटेक्टेड नेटवर्क कनेक्शन का इस्तेमाल करती हैं ताकि कोई बाहरी व्यक्ति उनके नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सके। लेकिन, कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद लॉकडाउन लागू हो गया। इससे लोग घर से ही ऑफिस का काम करने लगे। फिर वीपीएन सेवाओं की मांग बढ़ गई।

कोविड-19 की महामारी शुरू होने के बाद इंडिया में वीपीएन ऐप्स का इस्तेमाल काफी बढ़ा। 2021 की पहली छमाही में वीपीएन सेवाएं की पहुंच के लिहाज से इंडिया 85 देशों में चौथे पायदान पर था। 2020 में इंडिया में वीपीएन इंस्टॉलेशन 3.28 फीसदी था। 2021 की पहली छमाही में यह बढ़कर 25.27 फीसदी हो गया। एक अनुमान के मुताबिक, इंडिया में 27 करोड़ वीपीएन यूजर्स हैं।

MeitY के आदेश में कहा गया है कि वीपीएन सेवाएं देने वाली कंपनियों को यूजर के डेटा पांच साल तक अपने पास सुरक्षित रखने होंगे। इस दौरान सरकारी एंजेंसियों के मांगने पर उन्हें ये डेटा शेयर करने होंगे। नए नियम के 27 जून से लागू होने की संभावना है। ExpressVPN ने इस नियम को इंटरनेट फ्रीडम के खिलाफ बताया है। उसने यह भी कहा है कि सरकार साइबरक्राइम के खतरे के नाम पर इंटरनेट फ्रीडम में सेंध लगा रही है।

ExpressVPN का यह भी मानना है कि सरकार ने नए नियम से यूजर्स के डेटा का दुरुपयोग हो सकता है। उसने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है, "हमारा मानना है कि इस तरह के नियमों के दुरूपयोग होने की आशंका है। इसलिए सरकार इसके फायदे का जो दावा करती है, उसकी जगह नुकसान हो सकता है।" उसने कहा है कि वह यूजर्स के लॉग्स, एक्टिविटी, ब्राउजिंग हिस्ट्री, ट्रैफिक डेस्टिनेशन, कनेक्शन लॉग्स, टाइमस्टैंप्स या सेशन ड्यूरेशन की जानकारियां कभी कलेक्ट नहीं करेगी।

MeitY ने वीपीए सेवा देने वाली कंपनियों को सब्क्राइबर्स के नाम, उन्हें एलॉट किए गए आईपी, आईपी एड्रेसेज, ईमेल एड्रेसेज, वैलिडेटेड एड्रेसेज, कॉन्टैक्ट नंबर और ओनरशिप पैटर्न की जानकारियां पांच साल या इससे ज्यादा समय के लिए कलेक्ट और रिकॉर्ड करने को कहा है। कॉर्पोरेट वीपीएन को इस नियम से बाहर रखा गया है।

पिछले महीने NordVPN ने भी कहा था कि अगर उसे यूजर का डेटा शेयर और कलेक्ट करने को मजबूर किया गया तो वह इंडिया से अपने सर्वर हटा लेगी। स्विट्जरलैंड की ProtonVPN ने सरकार के नए नियमों पर नाराजगी जताई थी। उसने कहा था कि वह अपनी No-Logs पॉलिसी का पालन करती रहेगी। हालांकि, पिछले महीने MeitY में राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि वीपीएन कंपनियों को नए नियम का पालन करने या इंडिया छोड़ने को कहा था।

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